नई दिल्ली/इस्लामाबाद : पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ है, जिसमें कम से कम 5 लोग मारे गए हैं। हमले में 10 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि हमला शुक्रवार को शांति समिति के सदस्य के घर पर हुआ जब वहां शादी समारोह के दौरान जश्न चल रहा है। डेरा इस्माइल खान जिले के पुलिस सुपरिटेंडेंट सज्जाद अहमद साहिबजादा ने बताया कि यह एक आत्मघाती हमला था, जो पीस कमेटी के प्रमुख नूर आलम महसूद के घर पर हुआ। रेस्क्यू में जुड़े अधिकारियों ने बताया कि 5 शव और 10 घायलों को अस्पताल भेजा गया है।
बताया जा रहा है कि जब हमला किया गया उस समय मेहमान नाच रहे थे। धमाके से कमरे की छत गिर गई और लोग मलबे के नीचे फंस गए। इसके चलते लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया और बचाव अभियान में बाधा आई। रेस्क्यू विभाग ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सात एंबुलेंस, एक फायर वाहन और एक आपदा वाहन घटनास्थल पर पहुंच गए और बचाव अभियान शुरू किया।
शांति समिति के नेता की मौत : शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया है कि शांति समिति के नेता वहीदुल्लाह महसूद भी मरने वालों में शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू की है। खैबर पख्तूनख्वा (KP) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने धमाके की कड़ी निंदा की है और आईजी पुलिस से घटना की रिपोर्ट मांगी है। अफरीदी ने कहा है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
केपी बना पाकिस्तान के लिए मुश्किल : पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत ने हाल के वर्षों में चरमपंथी हिंसा में काफी बढ़ोतरी देखी है। अफगानिस्तान के बॉर्डर से सटा यह क्षेत्र तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का गढ़ रहा है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद टीटीपी ने यहां फिर अपने हमले तेज कर दिए हैं। साल 2025 में यह इलाका पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने लिए बहुत मुश्किल शामिल हुआ था। टीटीपी और उसके सहयोगी समूहों के हमलों में सैकड़ों पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए थे।
इस महीने की शुरुआत में हथियारबंद हमलावरों ने केपी के बन्नू जिले में एक शांति समिति के चार सदस्यों की हत्या कर दी थी। इसके पहले नवम्बर 2025 में बन्नू जिले में ही एक शांति समिति के दफ्तर पर हमला हुआ था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। पुलिस ने बताया था कि मारे गए लोगों में एक ‘अच्छा तालिबानी’ और बाकी उसके रिश्तेदार थे। अच्छे तालिबानी उन पूर्व आतंकवादियों को कहा जाता है जो पुलिस के सामने सरेंडर कर देते हैं।
