नई दिल्ली : पिछले वर्ष दुर्घटनाग्रस्त हुए तेजस मार्क-1 लड़ाकू विमानों की भरपाई के लिए भारतीय वायुसेना उच्च स्तर पर मंथन कर रही है। वायुसेना के शीर्ष अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि मौजूदा मार्क-1 लड़ाकू विमान के नए विमान शामिल किए जाएं या फिर संबंधित स्क्वाड्रन को सीधे उच्च स्तर के तेजस मार्क-1A एडिशन में परिवर्तित किया जाए।
पिछले दो वर्षों में दो तेजस लड़ाकू विमानों के नुकसान के बाद भारतीय वायुसेना इस पर विचार कर रही है। पहला हादसा मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर में हुआ था, वहीं दूसरा हादसा पिछले वर्ष 2025 में दुबई के एयरशो के दौरान हुआ था। एयरशो के दौरान हुआ यह हादसा दुनियाभर में काफी चर्चा में रहा, जिसके बाद तेजस के सेफ्टी लेवल पर भी सवाल उठे। दोनों ही लड़ाकू विमान अपेक्षाकृत काफी नए थे, दोनों ही चार वर्षों से भी कम समय से सेवा में थे।
जानकारी के अनुसार, ये दोनों ही विमान भारतीय वायुसेना की 18 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ का हिस्सा थे। इस स्क्वाड्रन के पास अभी भी स्वदेशी रूप से निर्मित 16 तेजस मार्क-1 फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) मानक के लड़ाकू विमान शेष हैं।
ये विमान दुश्मन को मात देने, ट्रेनिंग के लिए सक्षम हैं लेकिन तकनीकी रूप से आने वाले तेजस मार्क-1A विमानों की तुलना में पुराने माने जाते हैं। जबकि अपग्रेडेड मार्क-1A में हाई लेवल के रडार सिस्टम, जैमिंग क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सिस्टम और कई उच्च तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने फिलहाल इन दो विमानों की भरपाई नहीं की है। इसका मुख्य कारण तेजस मार्क-1A विमानों की डिलीवरी जल्द शुरू होना है। वायुसेना पहले ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को Mk1A के लिए बड़े ऑर्डर दे चुकी है। वर्ष 2021 में 73 सिंगल-सीटर और 10 ट्विन-सीटर विमानों का करार किया गया था, जिसके बाद हाल ही में अतिरिक्त 97 विमानों को मंजूरी दी गई है। इन विमानों का उत्पादन 2032 तक चलने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटनाग्रस्त हुए इन दो विमानों की भरपाई के संबंध में निर्णय तेजस मार्क 1A का उत्पादन स्थिर गति से होने पर लिया जाएगा। यदि वायुसेना को समय पर मार्क 1A विमानों की डिलीवरी होती है तो इन दो विमानों की भरपाई मार्क 1A के रूप में की जाएगी। फिलहाल वायुसेना की प्राथमिकता Mk1A कार्यक्रम को तेज करना है, ताकि स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ से जुड़े लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
