नई दिल्ली : पाकिस्तान को सपने में भी अंदाजा नहीं था कि जिस भारत को वह सॉफ्ट कंट्री समझता था. एक दिन उसका रौद्र अवतार भी देखने को मिलेगा. भारत इस वक्त अवतार में चल रहा है. वह आतंकी पाकिस्तान को किसी भी सूरत में बख्शने के मूड में नहीं है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर करके जिन्नालैंड की कमर तोड़ी थी. अब उसने खामोशी के साथ ऑपरेशन सावलकोट शुरू कर दिया है. यह ऑपरेशन अभी ढंग से शुरू भी नहीं हो पाया है कि इसकी आहट से ही पाकिस्तान घबराने लगा है.
असल में भारत ने चिनाब नदी पर 1856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना को शुरू कर दिया है. सिंधु जल समझौते के स्थगित करने के बाद भारत का पहला अहम वाटर प्रोजेक्ट है. जिसे पाकिस्तान को गहरा झटका देने वाला माना जा रहा है.
इस खबर के सामने आने के बाद पाकिस्तानी मीडिया में हंगामा मचा हुआ है. वहां के अखबार और न्यूज चैनलों पर भारत के इस रणनीति कदम की गंभीरता से चर्चा हो रही है. भारत की इस पहल को वहां पर ‘पाकिस्तान को सुखाने की साजिश’ कहा जा रहा है. कई मीडिया संस्थान तो इसे ‘जल आतंकवाद’ और ‘पांचवी पीढ़ी का युद्ध’ तक करार दे रहे हैं.
पाकिस्तानी चैनलों पर हो रही चर्चाओं में पैनलिस्ट आरोप लगा रहे हैं कि भारत चेनाब बेसिन से पानी के प्रवाह को कम करके हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी भारत की इस पहल पर रोना रोया है. गीदड़भभकी देते हुए उसने कहा कि यह 1960 की जलसंधि का उल्लंघन है और वह इसके लिए लडने को तैयार है.
वहीं भारत ने पाकिस्तान के इस स्यापे को कोई भाव नहीं दिया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि भारत में बनने वाली कोई भी विकास परियोजना हमारी अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से संचालित होती है. अफसरों ने साफ कहा कि सावलकोट एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है. जो संधि के ढांचे के तहत अनुमत श्रेणी में आती है. इसमें नदी बेसिन के बाहर पानी को मोड़ने की कोई बात नहीं है.