अमेरिका : शटडाउन की आड़ में विपक्षियों से चुन-चुनकर बदला ले रहे ट्रंप, 16 राज्यों की फंडिंग रोकी

नई दिल्ली : अमेरिका में जारी सरकारी शटडाउन ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हथियार बना लिया है. वह डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और उनके राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए संघीय बजट का इस्तेमाल कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने करीब 27 अरब डॉलर की फंडिंग पर रोक लगाई है जो विभिन्न डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों और शहरों को दी जानी थी. इस कदम से विवाद और गहराता जा रहा है.

डेमोक्रेट्स को बनाया निशाना : शटडाउन के बाद से ट्रंप ने विधायी गतिरोध को सुलझाने की बजाय इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है. वह इस संकट का इस्तेमाल अपने प्रतिद्वंद्वियों से बदला लेने, सरकारी खर्च घटाने और डेमोक्रेट्स पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं. प्रशासन ने 16 राज्यों को दी जाने वाली सहायता या तो स्थगित कर दी है या रोक दी है. इनमें से ज्यादातर राज्य डेमोक्रेट्स के शासन वाले हैं. न्यूयॉर्क समेत कई बड़े राज्यों को खासतौर पर निशाना बनाया गया है, जहां अरबों डॉलर की हरित ऊर्जा निधि रद्द कर दी गई है.

मुकदमों की बौछार, फिर भी बेपरवाह ट्रंप : ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ अब दर्जनों मुकदमे दायर हो चुके हैं. न्यूयॉर्क की डेमोक्रेट गवर्नर कैथी होचुल ने कहा है कि डेमोक्रेट शासित राज्य सीधे तौर पर ट्रंप के हमले झेल रहे हैं. अदालत ने हाल ही में न्यूयॉर्क के लिए 187 मिलियन डॉलर की आतंकवाद-रोधी निधि बहाल करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद ट्रंप कानूनी दबाव से बेपरवाह दिख रहे हैं. व्हाइट हाउस ने यहां तक संकेत दिए हैं कि पोर्टलैंड की वित्तीय सहायता में भी जल्द कटौती हो सकती है.

प्रोजेक्ट 2025 की शुरुआत : ट्रंप ने हाल ही में अपने अधिकारों की सीमा परखने के लिए प्रोजेक्ट 2025 पर काम शुरू करने की घोषणा की है. इसमें नौकरशाही और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का खाका तैयार किया जा रहा है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम दिखाता है कि उनके पास बजट पर व्यापक अधिकार हैं, जिनका इस्तेमाल वे राजनीतिक विरोधियों और संस्थानों को दबाने के लिए कर सकते हैं. इससे अमेरिकी लोकतंत्र में कार्यपालिका और विधायिका के बीच टकराव और बढ़ सकता है.

शटडाउन का भारी बोझ : कांग्रेस के बजट कार्यालय का अनुमान है कि शटडाउन के चलते प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है. इससे सरकार पर रोजाना लगभग 40 करोड़ डॉलर का बोझ पड़ रहा है. वहीं शिक्षा विभाग के करीब 90 प्रतिशत कर्मचारी और पर्यावरण एजेंसी के अधिकतर कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. न्याय विभाग के लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों पर असर पड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शटडाउन लंबा चला, तो इसका असर आम जनता के खर्च और देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ेगा.

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