नेपाल : बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न पर दुनिया भर में आक्रोश, धर्म के नाम पर हो रहा मानवता के खिलाफ अपराध

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नई दिल्ली/जनकपुर : बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के विरोध में गुरुवार को हिंदू संतों सहित बड़ी संख्या में लोग नेपाल के जनकपुरधाम की सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। प्राचीन शहर जनकपुर के जानकी मंदिर परिसर से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में बांग्लादेश में मारे गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए गए।

यह विरोध मार्च रामानंदिया वैष्णव संघ की ओर से आयोजित किया गया था। जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास ने कहा कि उग्र, उपद्रवी भीड़ ने दलित हिंदू दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी। उन्होंने उसे पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी। यह दिल दहला देने वाला है और हमें अंदर तक झकझोर देता है। आज हिंदू समूहों के संत और युवा इन अत्याचारों के खिलाफ सड़कों पर उतरे।

मैंने नेपाल सरकार को भी चेतावनी दी है कि वह बांग्लादेश पर हर संभव तरीके से दबाव डाले। किसी को भी दूसरों को मारने का अधिकार नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को अमानवीय और धर्म के नाम पर मानवता के खिलाफ अपराध बताया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को अमानवीय और धर्म के नाम पर मानवता के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हुए नारे लगाए व विरोध प्रदर्शन के दौरान झंडा जलाया।

भीड़ ने की थी दीपू की पीट-पीटकर हत्या, हर तरफ आक्रोश : पिछले सप्ताह बांग्लादेश के मयमनसिंह शहर में दीपू चंद्र दास की भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों के बाद पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जिससे नेपाल और भारत में आक्रोश फैल गया है। रामानंदिया वैष्णव संघ ने कहा, बांग्लादेश की हिंदू आबादी को 1947 के बाद से राजनीतिक घटनाओं के परिणामस्वरूप काफी नुकसान हुआ है।

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