बांग्लादेश : कट्टरपंथी इस्लामवादी हो गए बेलगाम, सेना प्रमुख की चेतावनी ने खोल दी पोल

Bangladesh-Islamic-Violance-Army-Head

नई दिल्ली : शेख हसीना का तख्तापलट करके अंतरिम सरकार के मुखिया बने मोहम्मद यूनुस का शराफत का नकाब उतर गया है. यूनुस की पोल उस शख्स ने खोली है, जिसके दम पर वो एक अच्छी इकॉनमी को उजाड़कर अपनी दुकान चलाने आए थे. यूनुस ने बांग्लादेश के छात्रों को मोहरा बनाकर खेल रचा था. यूनुस, खुद को खलीफा मानकर रहनुमाई कर रहे हैं. ये बात उन लोगों को चुभ रही है  जिन्होंने सरकार की पीठ पर छुरा भोंकने में जाने या अनजाने कोई मदद की. बात बांग्लादेशी सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल वकार की जो मुल्क के फ्यूचर को लेकर असमंजस में हैं. ऐसा लगता है कि वो कोई भूल सुधार और गलती का पश्चाताप करना चाहते हैं.

एक्सपोज हो गए मोहम्मद यूनुस : बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-जमान ने कहा है कि देश के सिस्टम पर कट्टरपंथी लोग हावी हो गए हैं. कानून व्यवस्था का बुरा हाल है. पुलिस निस्प्रभावी हो गई है. कट्टरपंथियों की भीड़ सेना पर हमला करने लगी है. जनरल ने हाल ही में मुल्क की सियासत में फैल चुकी सड़ांध और अराजकता का खुलासा किया था. उन्होंने दो टूक कहा था कि विखंडनकारी ताकतों को नहीं रोका गया तो मुल्क की स्वतंत्रता दांव पर लग जाएगी.

ढाका में सेना के एक कार्यक्रम में जनरल वकार का बयान बांग्लादेश में फैली अराजकता (Bangladesh Chaos) का सबूत था. जिससे ये पता चला कि मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली नामित अंतरिम सरकार, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की कट्टरपंथी युवा ताकतों की करतूतों को मूक दर्शक बने बैठे देख रही थी. पिछले साल 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद, बांग्लादेश हिंसा की आग में झुलस रहा है. दुनियाभर में चर्चा का विषय बन चुका है.

सेना पर हो रहा हमला : मौजूदा वक्त में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली स्थिति है. इस्लामिक चरमपंथियों के साथ कुछ खास दलों के राजनीतिक कार्यकर्ता, दंगाई बनकर लोगों को परेशान कर रहे हैं. वो भीड़ के रूप में सेना पर हमला करके फौजियों तक को निशाना बना रहे हैं. वकार के मुताबिक पुलिस निष्क्रिय हो चुकी है.

रैपिड एक्शन बटालियन के डायरेक्टर के मुताबिक, बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान देश में स्थिरता बहाल करने के लिए जल्द चुनाव कराना चाहते हैं. वो चाहते हैं कि देश की कानून व्यवस्था काबू में रहे क्योंकि रमजान के पाक महीने में कानून और व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है.

जबकि जनरल वाकर चाहते हैं कि सेना बैरक में वापस चली जाए क्योंकि पिछले छह से सात महीनों में सेना ही देश संभाले हुए है. सेना चुपचाप कट्टरपंथियों का उत्पात देख रही है. देश को आपराधिक तत्वों के अलावा राजनीतिक दलों के कट्टरपंथी भी लूट और मर्डर जैसी वारदातों में शामिल हो रहे हैं. वहीं अज्ञात बदमाशों द्वारा कॉक्स बाजार में बांग्लादेश के एयरफोर्स स्टेशन पर हमला बताता कि बांग्लादेश वाकई संकट में है. अनियंत्रित हिंसा में शामिल लोगों को कंट्रोल करने या उन पर मामला दर्ज करने में असमर्थ है.

कराह रहा है टका और मुल्क की अर्थव्यवस्था : निरंतर अशांति की स्थिति ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है. महंगाई दोगुनी हो चुकी है. टका और कमजोर हुई है. महंगाई रोकने के लिए बांग्लादेश बैंक ने नीति या रेपो दर को 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जिससे बैंक ऋण ब्याज 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है. बैंक लोन पर निर्भर छोटे, मध्यम और बड़े व्यवसायों पर सबसे अधिक मार पड़ी है. नौकरियां कम हुई हैं. औद्योगिक उत्पादन 40 प्रतिशत से गिरकर 25 प्रतिशत पर आ गया है. व्यापार स्थिर है, रोजगार-निवेश में लगातार नकारात्मक रुझान देखा जा रहा है. पूरे बांग्लादेश में विनिर्माण इकाइयां राजनीतिक अशांति, बर्बरता और आगजनी के कारण बदहाल हैं. मजदूर मिल नहीं रहे हैं. सैलरी बढ़ाने की मांग हर सेक्टर में हो रही है. डॉलर में अस्थिरता बनी हुई है और खाद्य मुद्रास्फीति 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है. बांग्लादेशी सेना प्रमुख ये सब जानते हैं, इसलिए हालात संभालने के लिए दो टूक चेतावनी दे रहे हैं.

बांग्लादेश बैंक के गवर्नर ने चेतावनी दी है कि गैर-निष्पादित ऋण छह महीने के भीतर लगभग दोगुना हो सकता है. एक्सपोर्ट कम हुआ है. उत्पादन लागत में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

जनता करेगी एक और तख्तापलट? : देश भर में हिंसक घटनाओं में हालिया वृद्धि के बीच, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों ने ढाका और देश भर में मानव श्रृंखला, विरोध प्रदर्शन और सड़क नाकेबंदी की है. ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा गृह सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी के इस्तीफे की मांग के बाद, लक्षित मंत्री ने देश में बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए अपदस्थ अवामी लीग के सहयोगियों को दोषी ठहराया है. जैत्या नागोरिक कमेटी के संयोजक नसीरुद्दीन पटवारी ने अंतरिम सरकार को चेतावनी दी है कि अगर यूनुस सरकार अवामी लीग के मुकदमे में देरी करती है या चुप रहती है तो जनता कानून अपने हाथ में लेने के लिए मजबूर हो जाएगी.

सेना चीफ ने दी वार्निंग : जनरल वकार ने मोहम्मद यूनुस से जल्द से जल्द आम चुनाव कराने के लिए कहकर अपना फर्ज निभा दिया है. उनका कहना है कि चुनाव हो जाएं ये उनकी तरफ से सबसे अच्छी सेवा होगी ताकि जनता को बीएनपी या अवामी लीग जैसी मुख्यधारा की पार्टियों में से अपने नेताओं को चुनने का मौका मिल सके.

भारत का रुख : ढाका में पाकिस्तान और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर अपनी वैध सुरक्षा चिंताओं के अलावा भारत को बांग्लादेश चुनावों में दखल देने में कोई दिलचस्पी नहीं है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि बांग्लादेश के नागरिक जल्द से जल्द सरकार चुने. वो ये भी चाहते हैं कि चीन और उसके सहयोगियों को भारत-प्रशांत के केंद्र में कहीं जगह न मिले. विदेश मंत्री जयशंकर कह चुके हैं कि ये बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को तय करना है कि वो सभी बुराइयों के लिए नई दिल्ली को दोषी ठहराने के बजाय भारत के साथ किस तरह का रिश्ता चाहती है? गेंद मोहम्मद यूनुस और जनरल ज़मान के पाले में है क्योंकि अपने देश में कानून व्यवस्था बहाल करना उनकी ही जिम्मेदारी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *