बांग्लादेश : देश की राजनीति में जैमा रहमान की एंट्री… भविष्य की नई खालिदा जिया? लंदन से लौटी ढाका

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नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश की राजनीति में एक नए खिलाड़ी की एंट्री हो गई है और वो हैं जैमा रहमान। जैमा बीएनपी के मुखिया तारिक रहमान की इकलौती बेटी हैं, जो हाल ही में अपने पिता के साथ लंदन से ढाका लौटी हैं। जैमा ने हाल ही में अपने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ‘मैंने अपनी जड़ों को सहेज कर रखना और उन्हें संजोना कभी नहीं भूला।’ अब जैमा उन्हीं जड़ों से जुड़ने बांग्लादेश लौटी हैं। जैमा ने लंदन में वकालत की पढ़ाई की है।

बीएनपी के लिए ट्रंप कार्ड हो सकती हैं जैमा : बीते शुक्रवार को बीएनपी के नेता तारिक रहमान निर्वासन में 17 साल लंदन में बिताने के बाद बांग्लादेश लौटे। इस दौरान जैमा की तस्वीरें भी लंदन से लेकर ढाका हवाई अड्डे तक खूब वायरल हुईं। माना जा रहा है कि जैमा बीएनपी के लिए युवा मतदाताओं को लुभा सकती हैं। बीएनपी पर भ्रष्टाचार, आतंकी साजिश रचने और सत्ता के दुरुपयोग जैसे आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले बीएनपी अपनी इस छवि से छुटकारा चाहती है और इसमें जैमा रहमान की अहम भूमिका हो सकती है, जो बीएनपी के नए नेतृत्व की प्रतीक बन सकती हैं। बांग्लादेश की राजनीति के जानकार उन्हें भविष्य की नई खालिदा जिया बता रहे हैं।

जैमा, बांग्लादेश की दो सबसे प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, खालिदा जिया और दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पोती हैं। बांग्लादेश के कई राजनीतिक घरानों के सदस्यों के विपरीत, जैमा को राजनीति का बहुत कम अनुभव है, क्योंकि उन्होंने न तो किसी पार्टी में औपचारिक पद संभाला है और न ही चुनाव लड़ा है। उनकी सार्वजनिक छवि भी सीमित रही है, और उनकी पेशेवर पहचान राजनीति के बजाय लंदन स्थित उनके वकालत के पेशे से जुड़ी है।

राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं जैमा रहमान : बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हुई हिंसा के बाद जैमा ने पहली बार राजनीतिक रूप से सक्रिय रुख अपनाया और बीएनपी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेना और उनका प्रतिनिधित्व करना शुरू किया। अपने पिता की ओर से वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक कार्यक्रम में भी जैमा ने हिस्सा लिया और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था। ज़ैमा ने अभी तक चुनाव लड़ने या बीएनपी में कोई औपचारिक भूमिका निभाने की कोई मंशा जाहिर नहीं की है। हालांकि, उनकी बढ़ती लोकप्रियता, सार्वजनिक बयानबाजी और प्रमुख राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति ने भविष्य में उनकी बड़ी भूमिका की अटकलों को हवा दी है।

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