बिहार : नीतीश कुमार को पद छोड़ने के बाद भी मिलेगी जेड प्लस सुरक्षा, 10 NSG समेत 55 पर्सन रहेंगे तैनात

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पटना : बिहार की राजनीति में होने वाले बड़े बदलाओं के बीच नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। आगामी 10 अप्रैल को उनके शपथ लेने की संभावना है। पद छोड़ने की तैयारी और सुरक्षा समीक्षा के बाद सरकार ने निर्णय लिया है कि उन्हें भविष्य में भी ‘जेड प्लस’ (Z+) श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने इस बाबत पुलिस महानिदेशक और डीजी (विशेष शाखा) को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत फैसला : गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा का योग्य माना गया है। विभाग ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और वर्तमान राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के बाद ये कदम उठाया गया है। ये कानून विशिष्ट व्यक्तियों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर सुरक्षा कवर प्रदान करने का अधिकार देता है।

हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं नीतीश कुमार : नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वे निकट भविष्य में मुख्यमंत्री पद से भी त्यागपत्र देकर दिल्ली में राज्यसभा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी बदलाव को देखते हुए सरकार ने पदमुक्त होने के बाद भी उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने का फैसला किया है।

10 अप्रैल को शपथ ग्रहण की संभावना : राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। शपथ ग्रहण से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए ‘जेड प्लस’ की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार में लंबे समय तक मुख्यमंत्री के ओहदे पर नीतीश कुमार रहे हैं। अब उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया है।

क्या होती है जेड प्लस (Z+) सुरक्षा? : जेड प्लस श्रेणी भारत में दी जाने वाली हाई लेवल की सुरक्षा इंतजामों में से एक है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति के घेरे में 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिनमें 10 से अधिक NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडो शामिल रहते हैं। इसके अलावा इसमें पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल होते हैं। सुरक्षा के इस घेरे में बुलेटप्रूफ गाड़ियां और एस्कॉर्ट वाहन भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

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