इस्लामाबाद : बलूचिस्तान के विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने न सिर्फ बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, बल्कि बलूचिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के कथित डेथ स्क्वाड को भी खत्म कर दिया है। अब पाकिस्तान उन्हीं डेथ स्क्वाड के सदस्यों को आम नागरिकों के तौर पर गिन रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि बलूचिस्तान में विद्रोहियों के साथ मुठभेड़ में 31 नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 लड़ाके मारे गए हैं।
प्रसिद्ध पाकिस्तानी सैन्य विशेषज्ञ और ‘मिलिट्री इंक’ की लेखिका आयशा सिद्धीका का कहना है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पाकिस्तानी सैनिक कैन्टोनमेंट में कैद होकर रह गए हैं। कोई भी सैनिक कैन्टोनमेंट के बाहर एक आसान लक्ष्य है। बलूच लोग उन्हें अपना मानते ही नहीं हैं।
पाकिस्तान का जो डेटा आया है कि इतने सिविलियन (आम नागरिक) मारे गए। दूसरी तरफ से जो क्लेम है, उसमें बहुत सारे सिविलियन जो मारे गए, वो डेथ स्क्वाड के सदस्य थे, जिन्हें बलूच लिबरेशन आर्मी के लिए रखा गया है। जैश-ए-मोहम्मद के लोग भी थे कुछ, जो मारे गए। उनको सिविलियन की कैटेगरी में लाएंगे कि नहीं लाएंगे। इसलिए लड़ाई अब बहुत पेंचीदा हो गई है।
पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का मुकाबला करने के लिए बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को तैनात किया है। ये आतंकवादी आम लोगों के घुल मिलकर बलूच विद्रोहियों के खिलाफ ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना की सहायता करते हैं।
इन आतंकियों को बाकायदा पाकिस्तानी सेना पैसे और हथियार देती है, ताकि वह आम लोगों की भीड़ में जाने से बची रहे। पाकिस्तानी सेना को आशंका है कि अगर वह बलूचिस्तान में इंटेलिजेंस या फिर जमीनी ऑपरेशन के लिए ऐसे इलाकों में जाती है, जहां से मदद दूर है तो उनके लिए खतरा बढ़ सकता है।