नई दिल्ली : गुजरात के आनंद जिले के एक युवक और एक महिला अमेरिका जाने के लिए गैरकानूनी रास्ते से निकले थे. अजरबैजान में उनका अपहरण हो गया. अपहरणकर्ताओं ने 65 लाख रुपये फिरौती मांगी. परिवार के सामने वीडियो कॉल पर मारपीट भी की. भारत सरकार के दखल के बाद 24 घंटे के भीतर दोनों को छुड़ा लिया गया.
ध्रुव पटेल और दीपीका पटेल ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान अजरबैजान की राजधानी बाकू में उन्हें बंधक बना लिया गया. मामला सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की मदद से दोनों को सुरक्षित छुड़ाया गया. अब वे भारतीय दूतावास की निगरानी में हैं. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत लौटेंगे.
ध्रुव पटेल 22 साल, झाखरिया गांव के रहने वाले हैं. दीपीका पटेल, 32 साल की हैं और कांथारिया गांव से हैं. दोनों गुजरात के आनंद जिले के रहने वाले हैं. परिवार के मुताबिक मुंबई के कुछ एजेंटों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे गैरकानूनी रास्ते से कई देशों के जरिए अमेरिका पहुंचा देंगे. 30 जनवरी को दोनों भारत से निकले और 1 फरवरी को अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंचे थे. बताया गया कि वहां पहुंचते ही कुछ लोगों ने उनका अपहरण कर लिया. उन्हें एक सुनसान घर में बंद कर दिया.
परिजनों का कहना है कि अपहरणकर्ताओं ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया था. कॉल के दौरान ध्रुव को परिवार के सामने पीटा गया था. अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो दोनों की किडनी निकालकर काले बाजार में बेच दी जाएगी. डरे हुए परिवार ने 65 लाख रुपये नकद और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दे दिए. हालांकि पैसे मिलने के बाद भी आरोपियों ने और रकम की मांग जारी रखी और जान से मारने की धमकी दी थी.
आनंद के सांसद मितेश पटेल ने बताया कि दो दिन पहले ध्रुव और दीपीका के माता-पिता उनके पास पहुंचे थे. उन्होंने अपहरण और फिरौती की पूरी जानकारी दी थी. मितेश पटेल ने कहा कि उन्होंने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लिया और संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली जाकर विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था. उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात कर पूरी स्थिति समझाई थी.
मितेश पटेल ने कहा कि सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत डॉ. एस जयशंकर से बात की. सरकार की तेजी से कार्रवाई के कारण 24 घंटे के अंदर दोनों को छुड़ा लिया गया. विदेश मंत्रालय ने बाकू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया. इसके बाद दूतावास की मदद से ध्रुव और दीपीका को सुरक्षित निकालकर दूतावास लाया गया.
फिलहाल दोनों अजरबैजान में भारतीय दूतावास की सुरक्षा में हैं. कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें भारत वापस लाया जाएगा. मितेश पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री का आभार जताया. साथ ही लोगों से अपील की कि ऐसे फर्जी एजेंटों के झांसे में न आएं. क्योंकि यह रास्ता बहुत खतरनाक साबित हो सकता है.