आर्मेनिया : CDS अनिल चौहान का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ भव्य स्वागत

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नई दिल्ली : चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया पहुंचे भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का येरेवान में भव्य स्वागत हुआ। रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक परिसर में सीडीएस अनिल चौहान को सैन्य ऑर्केस्ट्रा के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसका वीडियो आर्मेनिया की सेना सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय ने बताया कि भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का येरेवन में गर्मजोशी से स्वागत भारत की आर्मेनिया में राजदूत नीलाक्षी साहा सिन्हा और आर्मेनिया सशस्त्र बलों के उप प्रमुख मेजर जनरल तेमुर शाहनजार्यान ने किया। वहीं सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने सोमवार को येरेवन स्थित आर्मेनियाई नरसंहार स्मारक और संग्रहालय में पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने नरसंहार में मारे गए करीब 15 लाख आर्मेनियाई नागरिकों की स्मृति को नमन किया।

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि जनरल अनिल चौहान ने आर्मेनियाई नरसंहार स्मारक एवं संग्रहालय में पुष्पांजलि अर्पित कर नरसंहार में जान गंवाने वाले 15 लाख आर्मेनियाइयों को श्रद्धांजलि दी। स्मारक की प्रतीकात्मक संरचनाएं और उससे जुड़ा संग्रहालय मानवीय पीड़ा, संघर्षशीलता और स्मरण, न्याय एवं शांति के सार्वभौमिक महत्व की सशक्त याद दिलाते हैं।

भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जनरल अनिल चौहान रविवार को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया पहुंचे थे। यह यात्रा दोनों देशों के साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि दो सप्ताह पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मेनिया को भेजी जाने वाली गाइडेड पिनाका रॉकेट प्रणाली की पहली खेप को रवाना किया था। यह प्रणाली पुणे स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा निर्मित की गई है।

आर्मेनिया ने सितंबर 2022 में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत चार पिनाका रॉकेट सिस्टम बैटरियों की खरीद के लिए भारत के साथ करार किया था। इस समझौते में अनगाइडेड, विस्तारित रेंज और गाइडेड संस्करण शामिल हैं। आर्मेनिया पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर का पहला अंतरराष्ट्रीय ग्राहक भी बना, जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।

यह समझौता रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और भारत को एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

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