औरंगाबाद : भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लंबे समय से लंबित मामले में व्यवहार न्यायालय ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम डॉ. दीवान फहद की अदालत ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर औरंगाबाद समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है।
इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि डिक्री यानी न्यायालय के पूर्व फैसले का अनुपालन नहीं किया गया, जबकि संबंधित विभाग को पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया।
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट के नाजीर को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर कुर्की की कार्रवाई कर रिपोर्ट न्यायालय में समर्पित करें। ध्यान रहे कि मामला भूमि अधिग्रहण और उसके मुआवजे के भुगतान से जुड़ा है।
डिक्रिधारी हरे कृष्ण प्रसाद को अब तक मुआवजे की राशि नहीं दी गई है, जबकि इस संबंध में जिला विधि शाखा को कई बार समय दिया जा चुका था। सरकारी वकील बृजा प्रसाद सिंह ने बताया कि न्यायालय द्वारा शो-कॉज नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया कि मुआवजा भुगतान कब किया जाएगा। यही वजह रही कि अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए कुर्की का आदेश पारित किया।
इस मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने 09 मार्च की तिथि निर्धारित की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन करता है या फिर मामला और गंभीर मोड़ लेता है। उधर, जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि न्यायालय के आदेश की प्रति मंगाई जा रही है।
विधि शाखा से राय लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाएगा। कोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक सख्ती का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। यदि समय रहते मुआवजा भुगतान नहीं हुआ तो समाहरणालय की कुर्की की कार्रवाई जिले में एक ऐतिहासिक प्रशासनिक घटना बन सकती है।