दिल्ली : सबसे बड़ा ड्रग माफिया शराफत गेट तोड़कर गिरफ्तार

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नई दिल्ली : असम से पुलिस आई तो निजामुद्दीन पुलिस को दिल्ली के सबसे बड़े ड्रग्स माफिया शराफत शेख की याद आई। असम पुलिस उसे एक केस में दिल्ली से ले जाने की कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड की अर्जी लगाई तो निजामु्द्दीन पुलिस ने पूछताछ की गुहार लगा दी।

असम पुलिस ने निजामुद्दीन पुलिस की मदद से शराफत शेख को उसके घर का ताला तोड़कर गिरफ्तार किया है। दोनों राज्यों की पुलिस कई घंटे तक उसका गेट खोलने का इंतजार करती रही।

चार दशक तक जेल आने-जाने में लगा रहा शराफत शेख देश का पहसा ड्रग्स माफिया है जिस पर एनडीपीएस की विशेष धारा पिट-एनडीपीएस लगाई गई थी। यह धारा लगने के बाद पुलिस शराफत  शेख को दो वर्ष तक बिना किसी केस के हिरासत में रख सकती है।

एक अधिकारी ने बताया कि असम पुलिस तीन दिन पहले शराफत शेख को गिरफ्तार करने निजामुद्दीन आई थी। आरोपी ने कई घंटे तक गेट नहीं खोला। उसके बाद निजामुद्दीन थाना पुलिस को सूचना दी गई।

कई घंटे के इंतजार के बाद शराफत शेख के घर का मेन गेट तोड़ा गया और उसे गिरफ्तार किया गया। इस दौरान काफी हंगामा हो गया और हाथापाई की नौबत तक आ गई थी। कुछ दिन पहले निजामुद्दीन थाना ने बूचडख़ाना खोलने के मामले में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था।

ऐसे बना ड्रग्स माफिया :  ढाबे से नौकरी छोडऩे के बाद शराफत ने दिल्ली के मीना बाजार में एक दुकान पर काम करना शुरू किया। वर्ष 1987 में मामूली से झगड़े में गिरफ्तार हुआ था।  तब पहली बार जेल में बंद रहने के दौरान शराफत की मुलाकात ड्रग सप्लायर इनायत से हुई। उसके बाद शराफत ने ड्रग के धंधे में ही पांव बढ़ा दिए।

शराफत पर नकेल कसने के लिए उस पर स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988(पिट-एनडीपीएस) के तहत मामला दर्ज हुआ। इस कानून के तहत एक साल के लिए शराफत शेख तिहाड़ जेल में रहा। सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड और वित्त मंत्रालय ने इस एक्ट के सेक्शन-11 के तहत, दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

शराफत शेख ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद आधी जिंदगी जेल में गुजारी। बाकी जेल से बाहर युवा पीढ़ी को तबाह करने में गुजार रहा है। राष्ट्रीय राजधानी के इस खतरनाक ड्रग स्मग्लर के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों में करीब 35-36 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें ड्रग स्मग्लिंग, आर्म्स एक्ट, मारपीट तक के मुकदमे शामिल हैं। शराफत वर्ष 1977 में दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक ढाबे पर नौकरी करता था। 6 महीने में ही उसे वहां से नौकरी छोड़ दी।

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