लखनऊ : राजधानी लखनऊ में मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत केस दर्ज करने की तैयारी में है। हालिया छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर ईडी को विदेशी नागरिकता छिपाने, संदिग्ध फंडिंग और अवैध निवेश के संकेत मिले हैं।
जांच के मुताबिक शमशुल हुदा खान वर्ष 2013 में यूके की नागरिकता ले चुका था। आरोप है कि उसने इसकी जानकारी न तो भारत सरकार को दी और न ही संबंधित बैंकों को। इसके बावजूद वह 2017 तक सरकारी वेतन और 2023 तक पेंशन प्राप्त करता रहा।
फेमा के प्रावधानों के अनुसार विदेशी नागरिकों को अपने विदेशी स्टेटस की जानकारी वित्तीय संस्थानों को देना अनिवार्य है और वे सीमित प्रकार के बैंक खाते ही संचालित कर सकते हैं। खुलासा न करना फेमा का उल्लंघन माना जाता है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि शमशुल, उसकी पत्नी, बेटे, बहू और उनके एनजीओ रजा फाउंडेशन के चार बैंक खातों में 5.5 करोड़ रुपये से अधिक की एंट्री हुई। एजेंसी को आशंका है कि यह धनराशि या तो विदेशी स्रोतों से आई या प्रतिबंधित माध्यमों से भारत में लाई गई। फेमा के तहत विदेशी नागरिक सामान्य बचत खातों में बड़े पैमाने पर घरेलू लेनदेन नहीं कर सकते।
छापेमारी के दौरान ईडी को 17 अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनका घोषित मूल्य करीब 3 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य 20 करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। ईडी की आशंका है कि एनजीओ के नाम पर आए फंड का इस्तेमाल परिवारजनों के खातों में ट्रांसफर और संपत्ति खरीद में किया गया। अब इन संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि विदेशी नागरिक बनने के बाद भी शमशुल हुदा आधार, बैंकिंग केवाईसी और सरकारी खातों का उपयोग करता रहा। यह मामला कई आर्थिक और कानूनी उल्लंघनों की श्रेणी में आ सकता है।