जम्मू : जम्मू-कश्मीर के बडगाम में रविवार को अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का उदाहरण देखने को मिला। सुंदीपोरा गांव के लोगों ने मिलकर ईरान की अवाम के समर्थन में बड़े पैमाने पर दान अभियान चलाया। खुद आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने ईरान के लोगों के लिए दिल खोलकर दान दिया। कई जगहों पर दान कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में लोगों ने युद्धग्रस्त ईरान के लिए दान एकत्र किया है। इसमें नकद, सोना और तांबे के बर्तन जैसी चीजें शामिल थीं। ईरानी दूतावास ने इस मानवीय कार्य के लिए आभार व्यक्त किया है।
ईद समारोह के एक दिन बाद रविवार को घाटी के शिया-बहुल क्षेत्रों में युवाओं ने घर-घर जाकर दान जुटाया। यह दान पश्चिम एशिया में ईरान पर हुए युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए था। रैनवारी निवासी ऐजाज अहमद ने इसे ‘इस्राइल के जायोनी शासन और उसके समर्थकों द्वारा थोपा गया अवैध युद्ध’ बताया। उन्होंने कहा कि सभ्य दुनिया को ईरान के पीड़ित लोगों को सहायता भेजनी चाहिए। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित सभी वर्गों के लोगों ने इस दान अभियान में भाग लिया।
महिलाओं ने विशेष रूप से सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन और अन्य कीमती घरेलू सामान दान किए। कुछ परिवारों ने पशुधन भी दान किया। बच्चों ने अपनी बचत और जेब खर्च देकर योगदान दिया। यह दान मुख्य रूप से बडगाम और बारामूला में एकत्र किया गया, जहां शियाओं की अच्छी खासी आबादी है। एकत्रित योगदान को ईरानी दूतावास सहित आधिकारिक राहत संगठनों के माध्यम से जरूरतमंदों तक भेजा जाएगा।
ईरानी दूतावास ने एक्स (सोशल मीडिया मंच) पर तस्वीरों के साथ आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर के दयालु लोगों की मानवीय सहायता और हार्दिक एकजुटता को कभी नहीं भुलाया जाएगा। दूतावास ने यह भी कहा, “हम आपकी दयालुता और मानवता को कभी नहीं भूलेंगे।” उन्होंने अपने एक अन्य पोस्ट में भारत को धन्यवाद भी दिया।
यह दान ईरान में युद्ध से हुई भारी तबाही के पीड़ितों की मदद के लिए है। युद्ध को इजरायल और उसके समर्थकों द्वारा थोपा गया बताया गया है। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों तक सीधे राहत पहुंचाना है। कश्मीर के लोगों ने इस पहल के माध्यम से अपनी एकजुटता और समर्थन प्रदर्शित किया है।
