पटना : बिहार के वरिष्ठ नेता सतीश कुमार का सोमवार को निधन हो गया। उनकी मृत्यु पटना के फोर्ड अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। सतीश कुमार को ब्रेम हैमरेज हुआ था और इसके बाद उन्हें पटना लाकर भर्ती कराया गया था। सोमवार की रात 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
सतीश कुमार समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। सतीश कुमार एक बार नालंदा के अस्थावां से तो दूसरी बार सूर्यगढ़ा से बिहार में विधायक बने थे। अस्थावां में तो उन्होंने जीत के समय वोटों का रिकॉर्ड ही बना दिया। वो 2001 के उपचुनाव में 58,999 वोट लाए थे जो कुल वोटों का 47.06 प्रतिशत था।
सतीश कुमार ही वो नेता थे जिन्होंने पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने से पहले कुर्मी चेतना रैली के सूत्रधार के रूप में काम किया था। 12 फरवरी 1994 को पटना के गांधी मैदान में कुर्मी चेतना रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली के बाद बिहार की सियासत ने नई करवट लेनी शुरू कर दी थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को एक तरह से सीधी चुनौती मिली थी। इस रैली की भीड़ ने तब तत्कालीन जनता दल के कई नेताओं को बेचैन कर दिया था।
इस रैली के आयोजन की पूरी तैयारी सतीश कुमार ने की थी और नीतीश कुमार को पहली बार बिहार में बड़ा मंच मिला था। इसी रैली के बाद नीतीश कुमार बिहार के नायक के रूप में उभरे। बात अगर सतीश कुमार की करें तो वो काफी समय तक नीतीश कुमार के साथ जनता दल यूनाइटेड में रहे। लेकिन विद्रोह तो उनके स्वभाव में ही था।
लिहाजा कई बार उनके और पार्टी के बीच मनमुटाव चलता रहा। वो लोजपा और कांग्रेस में भी रहे। हालांकि 1990 में सतीश कुमार ने बतौर CPI उम्मीदवार बिहार विधानसभा चुनाव में सूर्यगढ़ा सीट से जीत दर्ज की थी।
