नई दिल्ली : आसमान में घूम रहे एलन मस्क के स्टारलिंक उपग्रहों में से कई अब हर दिन धरती पर गिर रहे हैं। ऐसे में चिंता वाली बात ये है कि कहीं अंतरिक्ष मलबे का ऐसा चेन रिएक्शन न शुरू हो जाए, जो भविष्य में पृथ्वी की निचली कक्षा के लिए असुरक्षा खड़ी कर सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि पृथ्वी की निचली कक्षा के लिए मनुष्य धीरे-धीरे एक नया खतरा पैदा करता जा रहा है। अंतरिक्ष कंपनियां इस कक्षा में लगातार स्पेसक्राफ्ट और सैटेलाइट्स भेजती रहती हैं, जो ऑर्बिट में लगातार चक्कर लगा रहे हैं। यहां स्टारलिंक जैसे हजारों की संख्या में सैटेलाइट घूम रहे हैं जो पृथ्वी पर कई अहम जानकारियां भेजते रहते हैं।
स्मिथसोनियन के खगोलशास्त्री जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि फिलहाल रोजाना एक से दो स्टारलिंक सैटेलाइट्स वायुमंडल में गिरकर नष्ट हो रहे हैं। आने वाले समय में यह संख्या पांच प्रतिदिन तक जा सकती है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे स्पेसएक्स, अमेजन के प्रोजेक्ट क्यूपर और चीन की सैटेलाइट प्रणालियां अपने प्रोजेक्ट्स लॉन्च करेंगी, यह समस्या और बढ़ेगी। हालांकि, स्टारलिंक नेटवर्क ने दुनिया के कई दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में क्रांति ला दी है, लेकिन इसकी तेजी से बढ़ती संख्या अब अंतरिक्ष यातायात और मलबे प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
कक्षा में हो सकते हैं 30 हजार से अधिक उपग्रह : मैकडॉवेल ने कहा, अभी 8,000 से ज्यादा स्टारलिंक उपग्रह कक्षा में सक्रिय हैं। जब सभी प्रणालियां पूरी तरह तैनात हो जाएंगी, तो इनकी संख्या 30 हजार से भी ज्यादा हो सकती है। अगर चीन के उपग्रह जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा 50 हजार तक पहुंच सकता है। प्रत्येक सैटेलाइट की उम्र करीब 5 से 7 साल होती है, इसके बाद वह या तो निष्क्रिय हो जाता है या तकनीकी खराबी और सौर गतिविधियों के कारण गिर जाता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी ‘केस्लर सिंड्रोम’ की आशंका : विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते मलबे से ‘केस्लर सिंड्रोम’ की स्थिति बन सकती है। इसका अर्थ ये हुआ कि एक सैटेलाइट से टकराने के बाद बना मलबा दूसरे से टकराता जाता है और एक शृंखलाबद्ध तरीके से गिरना शुरू हो जाता है। इससे अंतरिक्ष का एक बड़ा हिस्सा उपग्रहों के लिए खतरनाक हो सकता है। कक्षा में मलबे की मात्रा इतनी बढ़ सकती है कि वहां नए सैटेलाइट्स भेजने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
सूर्य की गतिविधि बना रही हालात और खराब : वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय सूर्य का सोलर मैक्सिमम (सूर्य का सबसे सक्रिय चरण) चल रहा है। इससे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में गर्मी और घनत्व बढ़ रहा है। इसके कारण उपग्रहों पर घर्षण बढ़ता है और वे धीरे-धीरे नीचे गिरने लगते हैं। कुछ को दोबारा ऊपर भेजा जा सकता है, लेकिन कई गिरने के लिए मजबूर हैं।
