नई दिल्ली : इस्लामिक देशों के अपने अलग कानून होते हैं. कुछ जगह शरिया कानून प्रचलन में हैं. दुनिया के किसी भी देश में वहां के निवासियों को स्थानीय कानूनों का पालन करना पड़ता है. यूं तो सभी मुस्लिम देशों में लड़कियों को सिर्फ अपने मजहब में निकाह यानी शादी करने की आजादी होती है. लेकिन फिर भी दुनिया में एक ऐसा इस्लामिक देश है, जहां लड़कियों की मोहब्बत और चाहत पर कोई पहरा नहीं है.
नाम भी जानिए : ये देश अरब वर्ल्ड के 22 देशों में गिना जाता है लेकिन यहां लड़कियों और महिलाओं को काफी आजादी है. ये एक प्राचीन मुल्क है, जिसका इतिहास बेहद शानदार रहा है. इस देश का नाम ट्यूनीशिया है. जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थिति है. उत्तर अफ्रीकी देश में महिलाएं एडवांस हैं. worldometers की रिपोर्ट के मुताबिक ट्यूनीशिया की आबादी करीब 1.25 करोड़ है. जिनमें 98.5% मुस्लिम, 1% ईसाई और 0.5% यहूदी हैं. मुसलमानों में करीब 98.7% मुसलमान सुन्नी और 0.3% शिया हैं.
कानून हटा दिया : पहले यहां की महिलाओं के लिए गैर-मुस्लिमों में निकाह करना बैन था. लेकिन काफी समय पहले ये पाबंदी हट चुकी है. इस नॉर्थ अफ्रीकन कंट्री में कानूनी तौर पर मुस्लिम लड़कियों को आजादी है कि वे गैर-इस्लामिक लड़के से निकाह कर सकती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017 में ट्यूनीशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति बेजी केड एसेब्सी ने पुराना नियम रद्द कर दिया था जो 1973 में बना था और इसमें जिक्र था कि इस्लाम कबूल करने के बाद ही कोई गैर-मुस्लिम लड़का किसी लड़की से शादी कर सकता था. ये छूट ट्यूनीशिया को बाकी के अरब देशों से अलग बनाती है.
बदलाव की बयार : कैंपेन फॉर जस्टिस की रिपोर्ट के मुताबिक यहां बहुविवाह और तलाक पर रोक की बात हुई. दूल्हा-दुल्हन की स्पष्ट रजामंदी से शादी पर जोर रहा. पुरुषों और महिलाओं को तलाक के लिए समान अधिकार मिले. 2007 में विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी आयु पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए 18 साल की गई. 2010 में ट्यूनीशियाई राष्ट्रीयता कानून में सुधार किया गया, जिससे महिलाओं को पुरुषों की तरह बच्चों को नागरिकता हस्तांतरित करने की अनुमति मिली. पति की आज्ञा मानने के पत्नी के कर्तव्य को लचीला बनाया गया.
यहां साल 2011 से अब तक कई संशोधनों और सुधारों ने पति-पत्नी के बीच समानता को बढ़ावा दिया है. साल 2017 में न्याय मंत्रालय के 8 सितंबर, 2017 के परिपत्र संख्या 164 द्वारा, 5 नवंबर, 1973 के परिपत्र संख्या 216 को निरस्त करते हुए, गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक से विवाह करने वाली ट्यूनीशियाई महिलाओं के लिए मिश्रित विवाह को ट्यूनीशिया में वैध बना दिया गया.
