रूस का भारत को बड़ा भरोसा, 95 लाख बैरल तेल भेजने की तैयारी; पश्चिम एशिया संकट में तेल आपूर्ति पर असर

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नई दिल्ली/मॉस्को : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। इसी बीच रूस ने भारत को बड़ा आश्वासन दिया है। रूस ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो वह भारत को लगभग 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने के लिए तैयार है। यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब भारत की तेल आपूर्ति पर संकट के संकेत दिख रहे हैं और देश के पास सीमित भंडार बचा है।

भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि देश के पास फिलहाल केवल करीब 25 दिनों की जरूरत के बराबर कच्चे तेल का भंडार है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे ईंधनों का स्टॉक भी सीमित बताया जा रहा है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होती है तो भारत को तुरंत वैकल्पिक स्रोतों की जरूरत पड़ सकती है। इसी स्थिति को देखते हुए रूस ने भारत को अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

पश्चिम एशिया संकट से तेल आपूर्ति पर असर : पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई भी हुई है, जिससे समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात तनावपूर्ण हैं। यही रास्ता दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात मार्गों में से एक माना जाता है। भारत अपने लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। ऐसे में इस मार्ग के लगभग बंद होने जैसी स्थिति से भारत को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े हैं।

मॉस्को में पुतिन से मिले हंगरी के विदेश मंत्री : व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को मॉस्को में पीटर सिज्जार्तो से मुलाकात की। बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा हंगरी को रूस से मिलने वाली तेल और गैस की सप्लाई रहा। मुलाकात के बाद सिज्जार्तो ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए मॉस्को आए हैं कि हंगरी को रूस से तेल और गैस मिलती रहे। उनका कहना है कि यूक्रेन के रास्ते आने वाली द्रुज्बा पाइपलाइन से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है। हंगरी ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन जानबूझकर तेल रोक रहा है, लेकिन यूक्रेन ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पाइपलाइन पर रूसी ड्रोन हमले का असर पड़ा है।

बैठक में पुतिन ने भरोसा दिलाया कि रूस अपने ऊर्जा समझौतों को पूरा करता रहा है और आगे भी करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक और यूरोपीय गैस बाजार में जो स्थिति बन रही है, उस पर दोनों देश मिलकर चर्चा करेंगे। इसके अलावा पुतिन ने यह भी घोषणा की कि यूक्रेन की सेना में लड़ते हुए पकड़े गए हंगरी मूल के दो युद्धबंदियों को रूस रिहा करेगा। यह फैसला हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान के अनुरोध के बाद लिया गया।

भारत को रूस से 95 लाख बैरल तेल मिल सकता है : ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रूस के लगभग 95 लाख बैरल कच्चे तेल से भरे जहाज भारत के आसपास समुद्री क्षेत्र में मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर यह तेल कुछ ही हफ्तों में भारत पहुंचाया जा सकता है। यह आपूर्ति भारतीय रिफाइनरियों को तत्काल राहत दे सकती है। भारत की रिफाइनरियां रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं। इसलिए अगर पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होती है तो रूस की यह पेशकश भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा दबाव : भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करते हैं। लेकिन भारत के पास चीन की तुलना में कम भंडारण क्षमता है। इसलिए क्षेत्रीय संकट का असर भारत पर ज्यादा पड़ सकता है। इसी बीच खबर यह भी है कि भारत और रूस के बीच तेल व्यापार लगातार जारी है। पहले रूस से आयात में कुछ कमी आई थी, लेकिन हाल के महीनों में फिर से इसमें बढ़ोतरी देखी गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि संकट के समय भारत अपने स्रोतों को विविध बनाकर आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा।

गैस आपूर्ति को लेकर भी नई चुनौती : इस संकट के बीच एक और चिंता गैस आपूर्ति को लेकर भी सामने आई है। कतर ने हाल ही में अपने एलएनजी उत्पादन को रोक दिया है। कतर भारत का प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता है। इसके कारण भारत में कुछ उद्योगों को गैस आपूर्ति कम करनी पड़ी है। ऐसे में रूस ने भारत को एलएनजी उपलब्ध कराने की भी तैयारी दिखाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है और भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर और सतर्क रहना होगा।

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