नई दिल्ली : पाकिस्तान में शुक्रवार 28 फरवरी को जुम्मे की नमाज के दौरान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में नौशेरा जिले के अकोरा खट्टक में स्थित मदरसा-ए-हक्कानिया में बम धमाका हुआ. इस भीषण विस्फोट में कुल 10 लोगों की मौत हुई है और 20 लोग घायल हुए हैं. इस हादसे में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-सामी के प्रमुख और प्रमुख धर्मगुरु मौलाना हमीदुल हक हक्कानी की मौत की भी पुष्टि हुई है. खैबर पख्तूनख्वा के IGP जुल्फिकार हमीद के मुताबिक यह हमला हक्कानी को टारगेट बनाकर किया गया था.
मौलाना हमीदुल हक हक्कानी की मौत : ‘AMU TV’ के मुताबिक मौलाना हमीदुल हक हक्कानी ने साल 2018 में अपने पिता मौलाना समीउल हक की हत्या के बाद से ही जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-सामी का नेतृत्व करने लगा था. उनके पिता को ‘फादर ऑफ तालिबान’ के रूप में भी जाना जाता है. वह अफगान तालिबान के कट्टर समर्थक थे और उन्होंने ही पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली मदरसों में से एक दारुल उलूम हक्कानिया की स्थापना की थी.
विवादों से घिरा है मदरसा : मदरसा-ए-हक्कानिया को साल 1947 में मौलाना अब्दुल हक हक्कानी ने स्थापित किया था. यह मदरसा लंबे समय तक विवादों से घिरा रहा है. आरोप है कि इसके कुछ छात्र साल 2007 में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों की हत्या से जुड़े थे, हालांकि मदरसे ने इस पर किसी भी तरह की संलिप्तता से मना किया है. ‘BBC’की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मदरसे के कई पूर्व छात्रों वरिष्ठ तालिबानी हस्तियों में से एक हैं. इनमें तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी, हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक मुल्ला जलालुद्दीन हक्कानी, अब्दुल लतीफ मंसूर और ग्वांतानामो बे के पूर्व बंदी खैरुल्लाह खैरख्वाह शामिल हैं.
पाकिस्तान में बढ़ रही आतंकवादी गतिविधियां : पाकिस्तान के मदरसे में हुआ यह बम धमाका इशारा देता है कि पाकिस्तान वापस हिंसा की ओर बढ़ रहा है. साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के वापस सत्ता में लौटने से यहां आतंकवादी गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं. इस्लामाबाद के ‘सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज’ के मुताबिक पाकिस्तान में पिछले साल 6 सालों के मुकाबले सबसे ज्यादा जनहानि हुई है, जिसमें 1,500 से अधिक लोग मारे गए. इनमें आम नागरिक, सुरक्षा बल और आतंकवादी शामिल थे. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बम धमाके की निंदा की है.