मनीष तिवारी भी मोदी सरकार के साथ, शशि थरूर के बाद कांग्रेस के स्टैंड को एक और झटका

PM-Modi

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर केंद्र के रुख पर मोदी सरकार को कांग्रेस के दो बड़े नेताओं का समर्थन मिला है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बाद पार्टी के एक और सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध में मोदी सरकार स्टैंड को सही बताया है।

बता दें कि कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के शुरू से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के स्टैंड पर आपत्ति जता रहा है। खासकर जिस तरह ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की इस हमले में मौत हुई और भारत की ओर से जल्दबाजी में कुछ नहीं कहा गया, तो कांग्रेस ने इसपर भी घोर आपत्ति जताई। लेकिन, अब पार्टी के दो-दो सांसदों ने सरकार की कूटनीति को सही बताया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा है, ‘यह समझना जरूरी है कि पश्चिम एशिया में एक युद्ध नहीं हो रहा है। वहां कई युद्ध एकसाथ चल रहे हैं…इजरायल और ईरान और अमेरिका के बीच जो कुछ हो रहा है, किसी एक का पक्ष लेना, यह सिर्फ मध्य पूर्व के डिनामिक्स तक ही सीमित नहीं है…खैर, ये हमारी लड़ाई नहीं है। मध्य पूर्व के बड़े हिस्से में हम हमेशा हाशिए के खिलाड़ी रहे हैं…।’

उन्होंने एक इंटरव्यू में ये बातें कही हैं। कांग्रेस नेता का कहना है, ‘अगर हम सावधान हैं, मैं समझता हूं कि शायद हम सही चीज कर रहे हैं, क्योंकि रणनीतिक स्वायत्तता असल में यही है, अपने हितों की रक्षा करने और आगे बढ़ने की क्षमता..।’

इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी एक लेख लिखकर खाड़ी में अपनाई जा रही भारत की नीति के लिए मोदी सरकार के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, ‘भारत की चुप्पी नैतिक सरेंडर नहीं,बल्कि एक बहुत जिम्मेदार कूटनीति है।’

कांग्रेस के इन दोनों नेताओं का स्टैंड पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से अलग है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पार्टी के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश और प्रवक्ता पवन खेड़ा सरकार के रुख पर सवाल उठा चुके हैं।

खासकर ईरान पर हमले और खामेनेई की मौत पर भारत सरकार के रुख पर इन्हें घोर आपत्ति रही है। राहुल गांधी का तर्क है कि भारत को ईरान पर हुई सैन्य कार्रवाई का खुला विरोध करना चाहिए। वहीं कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भारत की चुप्पी को विदेश नीति के लिए खतरा तक कहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *