नई दिल्ली : इस आम बजट में रेलवे को अब तक के सबसे अधिक 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें अकेले रेलवे सेफ्टी के लिए एक लाख 20 हजार करोड़ रुपए रखे गए हैं। जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेलवे को 2,52,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे।
इस बजट में रेलवे के लिए सबसे बड़ी घोषणा अहमदाबाद- मुंबई बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर की तरह सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की की गई है। जिसमें से एक हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस को भी कनेक्ट करेगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के दानकुनी से एक डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर अहमदाबाद के सूरत तक के लिए भी बनाया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट की घोषणा के बाद रेलवे बजट के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के लिए यह ऐतिहासिक बजट है। सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के बारे में उन्होंने बताया कि यह अहमदाबाद-मुंबई की तरह ही मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर होंगे।
रेल मंत्री ने कहा कि इन कॉरिडोर से खासतौर से साउथ इंडिया के पांचों राज्यों में शामिल तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के लोगों के लिए वरदान साबित होंगे। यह हाई स्पीड डायमंड कॉरिडोर होंगे। जो की दक्षिण भारत के राज्यों की भारत के अन्य हिस्सों से रेल कनेक्टिविटी को और अधिक स्पीड देंगे।
इनके बनने के बाद फिर दिल्ली से बनारस के बीच सफर का समय घटकर मात्र 3:50 मिनट का रह जाएगा। यानी इस हाई स्पीड कॉरिडोर के बनने के बाद लोग तीन घंटे 50 मिनट में दिल्ली से बनारस और बनारस से दिल्ली आवाजाही कर सकेंगे। इसी तरह से चेन्नई से बेंगलुरु के बीच का सफर मात्र 1:13 घंटे में किया जा सकेगा। इसी तरह से बेंगलुरु से हैदराबाद के बीच दो घंटे में यात्रा तय कर सकेगे। जबकि चेन्नई से हैदराबाद 2:55 घंटे में, मुंबई से पुणे मात्र 48 मिनट में, पुणे से हैदराबाद 1:55 घंटे और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच का सफर 2:55 घंटे में तय किया जा सकेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेल बजट में एक बड़ा हिस्सा यात्रियों की सुरक्षा के लिए खर्च किया जाएगा। इसके लिए बजट में एक लाख 20 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें जहां कवच लगाना अहम है। वहीं पुराने रेलवे ट्रैक की जगह नए ट्रैक बिछाना, सिग्नलिंग सिस्टम को और अधिक आधुनिक और एडवांस बनाना, अंडर और ओवर ब्रिज बनाना, रेलवे फाटक, टेलिकॉम, इलेक्ट्रिफिकेशन और आरपीएफ को और मजबूत करने के अलावा सुरक्षा से संबंधित और हेड में पैसा खर्च किया जाएगा।
इसमें फेस्टिव सीजन में भीड़-भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के तमाम उपाय करना भी शामिल है। साथ ही स्टेशनों और ट्रेनों में जाने वाले यात्रियों और उनके सामान की अच्छे से जांच करने के लिए उपकरण खरीदना भी शामिल है।
रेलवे को इस साल 31 मार्च तक तमाम खर्चे करते हुए 1957 करोड़ रुपए का प्रॉफिट होने की उम्मीद है। जबकि यह मुनाफा अगले साल 31 मार्च तक तीन हजार करोड़ रुपए बढ़ने की उम्मीद के रूप में बताया गया है। बजट में बताया गया है कि रेलवे को यात्री टिकट से 80 हजार करोड़ रुपए और माल ढोने से एक लाख 78 हजार 547 करोड़ रुपए का फायदा होने की उम्मीद है।
तमाम फायदे और खर्चों के बाद रेलवे को वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1957 और 2026-27 में तीन हजार करोड़ रुपए का फायदा होने की उम्मीद है। रेलवे का कहना है कि रेलवे का प्रॉफिट में आने के पीछे उनकी सटीक रणनीति है। जिसके चलते रेलवे फायदे में आती जा रही है।
बजट में रेलवे सेफ्टी पर बड़ा फोकस रखा गया है। ताकि ट्रेनों की किसी भी सूरत में कोई टक्कर ना हो जाए और ट्रेन डीरेल ना हो। हालांकि, जिस तरह से देश में वंदे भारत चेयरकार और वंदे भारत स्लीपर के लिए डिमांड देखी जा रही है। उसे देखते हुए इस बजट में रेलवे के लिए इन प्रीमियम ट्रेनों के लिए कोई अलग से विशेष घोषणा नहीं की गई है।
लेकिन इससे इतर बजट में अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की तरह सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इससे बजट में यह बताने की कोशिश की गई है कि रेलवे का भविष्य अब बुलेट ट्रेन के लिए तैयार करने का बनाया जा रहा है। ताकि लोग एक शहर से दूसरे शहरों में हवाई जहाज से ही नहीं बल्कि सस्ती दरों पर ट्रेनों से भी जा सकें।
