शेयर बाजार क्रैश, 1500 अंक टूटा सेंसेक्स; निवेशकों के डूबे 3.50 लाख करोड़

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नई दिल्ली : वित्त वर्ष के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में 1500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. कारण है डोनाल्ड ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ. जिसके दबाव में सेंसेक्स एक बार फिर से 76 हजार अंकों के नीचे चला गया. वहीं निफ्टी भी 23150 अंकों के नीचे आ चुका है.सबसे ज्यादा असर आईटी और बैंकिंग शेयरों पर पड़ा है. ऑटो को छोड़कर, सभी प्रमुख सेक्टर्स लाल निशान पर कारोबार करते हुए करते हुए दिखाई दिए. निफ्टी आईटी, रियल्टी, वित्तीय और कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स 1-3 फीसदी की गिरावट आई. खास बात तो ये है कि बीएसई के मार्केट कैप में 3.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली.

शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ ही नहीं है. बल्कि उसके तीन और यार शेयर बाजार को दबाने की कोशिश में लगे हैं. जिसमें कच्चे तेल की कीमतें 5 हफ्तों के हाई पर पहुंच गए हैं. वहीं दूसरी ओर आईटी शेयर प्रेशर में देखने को मिल रहे हैं. वहीं मार्च के महीने में आई स्ट्रांग रैली के बाद शेयर बाजार में बिकवाली हावी हो गई है, जिसे हवा ट्रंप का टैरिफ दे रहा है.

ट्रंप की टैरिफ से बढ़ी चिंता : 2 अप्रैल सिर्फ अमेरिका या फिर भारत के लिए ही अहम नहीं है. बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी काफी अहम है. इस दिन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिबरेशन डे का नाम किया है. 2 अप्रैल को ट्रंप का रेसीप्रोकल टैरिफ पूरी दुनिया पर लागू हो जाएगा. ट्रंप ने बीते दिनों कहा भी था कि ये तमाम टैरिफ सभी देशों को टारगेट करेंगे. जिसकी वजह से ग्लोबल ट्रेड वॉर की संभावना बढ़ गई है. जोकि ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को स्लो कर सकता है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने ईटी से बात करते हुए कहा कि ग्लोबल लेवल पर बाजार 2 अप्रैल से लागू होने वाले ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ के डिटेल पर फोकस है. टैरिफ लागू होने के बाद मार्केट का ट्रेंड टैरिफ डिटेल और विभिन्न देशों और सेक्टर्स पर पड़ने वाले उसके प्रभावाों पर निर्भर करेगा.

प्रेशर में आईटी स्टॉक : अमेरिकी बाजार पर बहुत अधिक निर्भर आईटी कंपनियों में कमजोर मांग की चिंताओं की वजह से 1.8 फीसदी की गिरावट आई. मार्च तिमाही में इस सेक्टर में पहले ही 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, जिससे निफ्टी 50 में गिरावट देखने को मिली है. मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 26 में आईटी फर्मों के लिए रेवेन्यू काफी कम रहने का अनुमान है और कमाई में गिरावट का रिस्क भी बना रहेगा.

5 हफ्तों के हाई पर कच्चा तेल : कच्चे तेल की कीमतें पांच हफ्तों के हाई पर पहुंच गई हैं. जिसकी वजह से महंगाई की चिंता बढ़ गई है. ब्रेंट क्रूड 74.67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जबकि यू.एस. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 71.37 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. तेल की ऊंची कीमतें भारत के राजकोषीय घाटे और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं.

जोरदार तेजी के बाद मुनाफावसूली : पिछले आठ सत्रों में निफ्टी और सेंसेक्स में करीब 5.4 फीसदी की तेजी आई थी, जो इस साल के लिए पॉजिटिव रहा. निवेशक हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली करते दिख रहे हैं, जिससे बाजार में गिरावट आई है. कम समय में वैल्यूएशन में तेज उछाल ने कुछ व्यापारियों को सतर्क भी कर दिया है, जिससे दिग्गज शेयरों में बिकवाली बढ़ गई है. विजयकुमार ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि मार्च में भारत ने 6.3 फीसदी रिटर्न के साथ अधिकांश बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया. एफआईआई के खरीदार बनने और इसके परिणामस्वरूप शॉर्ट कवरिंग ने तेजी में योगदान दिया.

क्या फिर आएगी तेजी : क्या तेजी जारी रहेगी या फिर मंदी आएगी? इस बात का जवाब देते हुए विजयकुमार ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप टैरिफ में क्या घोषणा करते हैं. अगर टैरिफ आशंका से कम हैं तो बाजार में तेजी आ सकती है, जिसका नेतृत्व फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे बाहरी रूप से जुड़े क्षेत्रों द्वारा किया जाएगा. दूसरी ओर अगर टैरिफ गंभीर हैं तो बाजार में मंदी का एक और दौर आ सकता है.

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