न्यूयॉर्क : दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में गिने जाने वाले द वॉशिंगटन पोस्ट में बुधवार को बड़े पैमाने पर छंटनी की गई। इस फैसले से अखबार की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग, स्पोर्ट्स डेस्क और कई अन्य विभाग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। छंटनी के बाद कई वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा किया। इस छंटनी में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी शामिल है। ईशान लंबे समय से वॉशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे।
छंटनी का शिकार हुए ईसान थरूर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना दर्द साझा किया। ईशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें नौकरी से निकाले जाने का बेहद दुख है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में जिन अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों और संपादकों के साथ उन्होंने काम किया, उनसे अलग होना दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि 2017 में शुरू किया गया उनका कॉलम ‘वर्ल्ड व्यू’ उनके करियर का सम्मानजनक हिस्सा रहा, जिसे लाखों पाठकों ने पढ़ा।
बता दें कि इस छंटनी का सबसे बड़ा असर वॉशिंगटन पोस्ट की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग टीम पर पड़ा है। पश्चिम एशिया की पूरी टीम हटाई गई। साथ ही दिल्ली, बीजिंग, कीव, लैटिन अमेरिका और बर्लिन जैसे अहम ब्यूरो बंद या बहुत छोटे कर दिए गए। वहीं यरुशलम ब्यूरो चीफ गेरी शिह ने कहा कि उन्होंने सात साल तक दुनिया भर में रिपोर्टिंग की और यह उनके जीवन का खास अनुभव रहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज का दिन दुखद है, लेकिन हमने सच्ची पत्रकारिता की।
इतना ही नहीं इस छंटनी का शिकार युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार भी हुए हैं। उदाहरण के तौर पर काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर, यूक्रेन में रिपोर्टिंग कर रहीं लिजी जॉनसन और बर्लिन ब्यूरो चीफ एरन वीनर। इन सभी की नौकरी इस छंटनी में चली गई। इन सभी ने कहा कि अचानक नौकरी जाना बेहद पीड़ादायक है, खासकर तब जब वे युद्ध और संकट वाले इलाकों से रिपोर्टिंग कर रहे थे। लिजी जॉनसन ने लिखा कि उन्हें युद्ध क्षेत्र के बीच नौकरी से निकाला गया, जिससे वह पूरी तरह टूट गई हैं।
इसके साथ ही वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी स्पोर्ट्स डेस्क को भी बंद कर दिया है। स्पोर्ट्स इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर विल हॉब्सन ने कहा कि 11 साल तक अरबपतियों और ताकतवर लोगों के खिलाफ रिपोर्टिंग करना उनके जीवन का सपना था, जो अब अचानक खत्म हो गया।
वहीं अब अखबरा के पक्ष की बात करें तो अखबार प्रबंधन ने कहा कि यह फैसला बड़े पुनर्गठन के तहत लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन पोस्ट के लगभग एक-तिहाई कर्मचारियों पर इसका असर पड़ा है। वहीं वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टी बैरन ने इसे अखबार के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ पत्रकारिता कमजोर होगी, बल्कि जनता को सच्ची और जमीनी खबरें मिलना भी मुश्किल होगा। वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड (कर्मचारी यूनियन) ने अखबार के मालिक जेफ बेजोस से अपील की कि वे पत्रकारिता के मिशन में निवेश जारी रखें। यूनियन ने साफ कहा कर्मचारियों के बिना वॉशिंगटन पोस्ट नहीं हो सकता। गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं।
