भारतीय कैप्टन की सूझबूझ ने पाकिस्तानियों समेत 29 क्रू मेंबर्स को बचाया

Ship-India

नई दिल्ली/मुंबई : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर मुंबई पोर्ट पर पहुंचा। इस जहाज की जर्नी बेहद ही रोमांचक रही। तीन दिन पहले ही ड्रोन और मिसाइलों के हमले के बीच ईरान के होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते वक्त यह जहाज भारतीय कैप्टन की सुक्षांत सिंह संधु की सूझबूझ से बच बचाकर भारत आ गया। संधु और उनकी टीम ने दिलेरी दिखाकर ‘गोइंग डार्क’ टैक्टिस अपनाकर न केवल जहाज को सुरक्षित निकाला, बल्कि भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के 29 क्रू मेंबर्स को भी बचाकर ले आए।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स जहाजी ऑयल टैंकर मुंबई पोर्ट के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर आया। इसमें 1,35,335 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल तेल लदा था। यह जहाज शेनलॉन्ग शिपिंग लिमिटेड का था, जिसे एथेंस बेस्ड डायनाकॉ टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा मैनेज किया जा रहा था। इस जहाज में 29 क्रू मेंबर्स थे, जिसमें भारत, पाकिस्तान, फिलीपींस के लोग थे। जहाज को एक भारतीय कैप्टन सुक्षांत सिंह संधु चला रहे थे।

अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई ओर तेज हो गई है। फिलहाल, युद्ध थमता नहीं दिख रहा है। इस बीच, भारत की ओर जा रहा जहाज हमलों के बीच बिना पकड़ में आए फारस की खाड़ी से सुरक्षित लौट आया। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जहाज लाइबेरियाई झंडे वाला था, जो बीते 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तानुरा से कच्चा तेल लेकर निकला था।

कैप्टन संधु और उनकी टीम ने 8 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते वक्त जहाज का ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) और ट्रांसपोंडर स्विच ऑफ कर दिया, जिससे यह जहाज मैरीटाइम ट्रैकिंग डाटा की पकड़ में नहीं आया। यह एक तरह से सबकी नजरों से लापता हो गया।

रिपोर्ट के अनुसार, संधु की टीम के इस काम से जहाज की निगरानी नहीं हो पाई। जब जहाज हाई रिस्क एरिया से निकल आया तो फिर से यह मैरीटाइम ट्रैकिंग सिस्टम पर नजर आया। इसके बाद से यह जहाज भारत के सफर पर निकल पड़ा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिपिंग कंपनियां अक्सर इस तरह की सूझबूझ अपनाती हैं। वह भी उस वक्त जब जहाज को टारगेट किए जाने, ट्रैक किए जाने या बंधक बनाए जाने का खतरा हो।

इंटरनेशनल मैरीटाइम रूल्स के मुताबिक, जहाजों को अपना AIS हमेशा एक्टिव रखना होता हे, ताकि उनकी सुरक्षा की जा सके और उनकी ट्रैकिंग की जा सके। इसे केवल इमरजेंसी सिचुएशन में ही अपनाया जाता है।

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