भारत में साल 2026 का पहला ‘सुपर मून’, पूर्णिमा की तुलना में 30% अधिक चमकीला दिखा

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नई दिल्ली : भारत में भी साल 2026 का पहला ‘सुपरमून’, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘वुल्फ मून’ के नाम से जाना जाता है, देखा गया। इस खगोलीय घटना के दौरान, चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में 30% अधिक चमकीला दिखाई दिया। शनिवार की आधी रात के आसपास यह चमका और इसके पास ही एक चमकीला तारा नजर आया, जो बृहस्पति था। शनिवार को नजर आने वाला चंद्रमा पेरिगी पर स्थित था, जिसका मतलब चंद्रमा की कक्षा में वह बिंदु जो पृथ्वी के सबसे करीब होता है।

सुपर मून को क्यों कहते हैं वुल्फ मून : खगोलीय भाषा में इसे सुपर वुल्फ मून भी कहते हैं। सुपर मून जिसे ‘वुल्फ मून’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी वजह ये है कि जनवरी में कड़ाके की ठंड के दौरान पहले के दिनों में उत्तरी गोलार्ध में भेड़ियों के झुंड की आवाज अधिक सुनाई देती थी और इसी वजह से इस दिन होने वाले पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया। यह नाम उत्तरी गोलार्ध की प्राचीन लोककथाओं से जुड़ा है। आज का वुल्फ मून खास इसलिए है क्योंकि इस समय धरती सूर्य के करीब होती है, जिसके कारण चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी और ज्यादा स्पष्ट हो जाती है और यही सुपर मून कहलाता है।

सुपर मून क्यों होता है खास? : सामान्य दिनों में सूर्य पृथ्वी से लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर दूर होता है लेकिन जब सुपर मून होता है तब सूर्य भी पृथ्वी के करीब होता है और पूर्णिमा का चांद धरती के सबसे नजदीकी बिंदु, जिसे पेरिजी कहा जाता है उसके आसपास होता है। बता दें कि चांद का ऑर्बिट पूरी तरह गोल नहीं बल्कि अंडाकार होती है, इसलिए उसकी धरती से दूरी समय-समय पर बदलती रहती है और जब चंद्रमा धरती के करीब होता है, तब वह आकार में बड़ा और रोशनी में ज्यादा तेज नजर आता है। हालांकि यह अंतर आंखों से बहुत ज्यादा स्पष्ट न लगे, लेकिन चमक आपको महसूस होगी।

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