नई दिल्ली/बैंकॉक : थाईलैंड से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां जेल जाने की आशंकाओं के बीच थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा गुरुवार को अचानक सिंगापुर जाने की बात बोलकर किसी अन्य देश के लिए रवाना हो गए। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा इसलिए तेज हो रही है क्योंकि पांच दिन बाद अदालत का एक अहम फैसला आना है, जिसमें अदालत थाकसिन को जेल की सजा सुना सकती है। हालांकि उनकी यह यात्रा ऐसे समय हुई जब एक हफ्ता पहले ही थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने उनकी बेटी और तत्कालीन प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा को पद से हटा दिया था। कोर्ट ने उन्हें कम्बोडिया के एक नेता से विवादास्पद फोन कॉल को लेकर आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी ठहराया।
सिंगापुर बोलकर कहां निकल गए थाकसिन? : अपनी यात्रा से पहले थाकसिन ने बैंकॉक के डॉन मुएंग एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों को बताया कि वह सिंगापुर जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ कोई गिरफ्तारी वारंट या कोर्ट ऑर्डर नहीं था, इसलिए उन्हें जाने दिया गया। हालांकि, फ्लाइट डेटा से पता चला कि उनका निजी विमान पहले सिंगापुर की ओर गया लेकिन फिर दिशा बदलकर भारत की ओर मुड़ गया। इसके बाद विमान दुबई की दिशा में उड़ता दिखा। सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि वह फिर से दुबई लौट गए हैं, जहां वह 2008 से स्वनिर्वासन में रह चुके हैं।
क्या आरोप और किस मामले में होगी जेल : थाकसिन 2001 से 2006 तक थाईलैंड के प्रधानमंत्री रहे। 2006 में जब वह विदेश दौरे पर थे, तब सेना ने उन्हें सत्ता से हटा दिया। 2008 में वह थाईलैंड लौटे, लेकिन भ्रष्टाचार के एक मामले में फैसले से पहले ही देश छोड़ दिया और वापस नहीं आए। इसके बाद 2023 में वह फिर थाईलैंड लौटे और आठ साल की सजा काटने पहुंचे। लेकिन उन्हें जेल के बजाय बैंकॉक के पुलिस जनरल हॉस्पिटल में रखा गया, जिससे विशेष इलाज और सुविधा मिलने के आरोप लगे।
बाद में राजा ने उनकी सजा घटाकर एक साल कर दी और छह महीने बाद उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। अब अदालत यह तय करेगी कि उन्हें मिली विशेष सुविधाएं नियमों के तहत थीं या नहीं। अगर थाकसिन को इन फैसलों में मिली छूट में उनकी मिलीभगत पाई गई, तो उन पर नए आरोप लग सकते हैं और वे फिर से जेल जा सकते हैं।
राजनीतिक युग का अंत? : गौरतलब है कि थाईलैंड की संसद अब नई सरकार के लिए प्रधानमंत्री चुनने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह थाकसिन और उनके राजनीतिक नेटवर्क के 20 साल लंबे प्रभाव के अंत की शुरुआत हो सकती है। थाकसिन पर पहले भी कई मामलों में मुकदमे चल चुके हैं, जिनमें वह खुद को हमेशा राजनीति का शिकार बताते रहे हैं। पिछले महीने अदालत ने उन्हें राजद्रोह के एक बड़े मामले में बरी कर दिया था, जिससे उन्हें 15 साल की सजा हो सकती थी।
