नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में आम चुनाव होने है। इसके मद्देनजर देशभर में तैयारी तेज हो चुकी है। दूसरी ओर इस मामले में अब बांग्लादेश चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बुधवार को घोषणा की कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) लॉक कर दिया गया है, जिससे वह आगामी फरवरी 2025 के आम चुनाव में वोट नहीं दे सकेंगी। चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने बताया कि जिनका एनआईडी कार्ड लॉक होगा, वे विदेश से वोट नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि हसीना का वोटर कार्ड लॉक हो चुका है।
हालांकि मामले में अख्तर अहमद ने अन्य नामों का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हसीना की बहन शेख रिहाना, बेटे साजिब वाजेद जॉय और बेटी सैमा वाजेद पुतुल के भी वोटर कार्ड लॉक या ब्लॉक किए गए हैं।
इसके अलावा रिहाना के बच्चे, उनके ससुराल वाले और हसीना के पूर्व सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल तारिक अहमद सिद्दिकी और उनके परिवार के भी वोट देने से रोक लगा दी गई है। इसको लेकर चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जो लोग न्याय से बचने के लिए विदेश भाग गए हैं, वे अभी भी वोट दे सकते हैं यदि उनका एनआईडी कार्ड सक्रिय है।
कैसे बांग्लादेश छात्र आंदोलन ने बदली तस्वीर? : बता दें कि बीते साल पांच अगस्त 2024 को छात्रों के हिंसक आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिरा दी गई थी, जिसके बाद उन्हें भारत भागना पड़ा था। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभाला और शेख हसीना समेत अन्य नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के लिए पार्टी की गतिविधियां रोक दीं। शेख हसीना पर बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में गैरहाजिरी में मुकदमा चल रहा है, जहां उनपर 2024 के जुलाई के आंदोलन में मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप है।
ऐसे में अधिकांश वरिष्ठ अवामी लीग नेता अब भूमिगत या निर्वासन में हैं, क्योंकि हिंसक समूहों ने उनके घर और संपत्तियों को तोड़फोड़ और आग के हवाले कर दिया है, जिसमें शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का घर भी शामिल है।
