नई दिल्ली/काहिरा : सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच शुक्रवार को उत्तरी दारफुर के अल फशर शहर में एक मस्जिद को निशाना बनाया गया। यहां नमाज के दौरान मस्जिद पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हो गई। हमले का आरोप अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेस पर लगाया गया है।
स्थानीय राहत समूह के एक कार्यकर्ता ने इस हमले के बाद का भयावह मंजर बयां किया। उसने बताया कि हमले के बाद मस्जिद पूरी तरह ढह गई है और कई शव मलबे में दबे हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। वहीं, हमले का वीडियो भी सामने आया है, हालांकि वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है।
वहीं, सूडानी सेना ने इस हमले को लेकर बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना इस विद्रोही मिलिशिया की पहचान है, और यह पूरी दुनिया के सामने खुलेआम ऐसा कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले इस सप्ताह की शुरुआत में ही आरएसएफ ने अल-फाशेर में 18 लोगों की हत्या कर दी थी और 14 अन्य को अगवा कर लिया था, जिनमें तीन लड़कियां भी शामिल हैं।
सूडान में अप्रैल 2023 से जारी है गृहयुद्ध : सूडान में गृहयुद्ध अप्रैल 2023 से जारी है, जब सेना और आरएसएफ के कमांडरों के बीच सत्ता को लेकर संघर्ष शुरू हुआ था। इस लड़ाई ने पूर्वोत्तर अफ्रीकी देश को बर्बाद कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 1.2 करोड़ विस्थापित हुए हैं। अल फशर पिछले एक साल से संघर्ष का केंद्र बना हुआ है और यह सेना का दारफुर में अंतिम ठिकाना बचा हुआ है।
ICC मानवता के खिलाफ अपराधों की कर रहा जांच : इस लड़ाई में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। खासकर दारफुर क्षेत्र में सामूहिक हत्याएं और दुष्कर्म जैसी अमानवीय घटनाएं हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) संघर्ष में संभावित अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय सूडान की इस स्थिति को लेकर चिंतित है। उसने इस संघर्ष की आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2025 के बीच केवल दारफुर क्षेत्र में ही 3,384 नागरिकों की मौत दर्ज की गई। हाल ही में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रतिनिधि ली फंग ने कहा था कि अल-फाशेर की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। लोग भोजन, पानी और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। यहां फंसे नागरिकों के पास कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है।
