मथुरा : वृंदावन के ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर का रहस्यमयी खजाना तो खुल गया है लेकिन अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है आखिर खजाने का माल कहां गया। उम्मीद तो यह लगाई जा रही थी कि खजाने में कीमती हीरे, जवाहरात हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला। कमेटी के सदस्य सेवायत ने भी सवाल खड़ा किया और इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की प्रशासनिक अधिकारियों से बात कही है।
खजाने में खाली संदूक और आभूषणों के खाली बाॅक्स मिले जो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। गौरतलब है कि श्री बांकेबिहारी मंदिर में 54 वर्षों से बंद मंदिर का तोषखाना जब खोला गया तो उसमें निकले सामान को लेकर सभी को आश्चर्यचकित रह गए।
इस तोषखाने में कोई भी कीमती वस्तु नहीं निकली। वहां एक संदूक निकला। जिसमें कुंदे टूटे हुए हैं। जब बक्सा खोला गया तो उसमें देखा कि उसमें आभूषणों के खाली डिब्बे रखे थे। इसे देखकर काफी चर्चाएं होने लगीं। वहीं कुछ बर्तन और लकड़ी का सामान अभी तक मिला है। जिसकी लिखापढ़ी के बाद दोबारा सामान को तोषखाने में रख दिया है और उसे सील कर दिया है। आगामी दिनों में फिर से यह तोषखाना खुल सकता है। अभी दो और संदूक बाकी हैं, जिन्हें खोला नहीं गया है। यह आस कम ही है कि उनके भीतर कुछ निकलेगा।
श्री बांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी का कहना है कि खजाना तो खुल गया लेकिन सवाल जरूर खड़ा कर गया, आखिर सारी चीजें कहां चली गईं। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है। वह अगली मीटिंग में भी इस बात को प्रमुखता के साथ उठाएंगे। अध्यक्ष से मांग करेंगे कि वह इस मामले जांच कराएं। ऐसा कैसे हो सकता है कि खाली डिब्बे निकलें और माल नहीं। साथ ही बक्से के कुंदे भी कटे निकले। यह मामला अब बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।
सेवायत सदस्य दिनेश गोस्वामी यह भी बताते हैं कि इस तोषखाने में दो बार चोरी की वारदात भी हो चुकी हैं। पहली चोरी सन 1926 और दूसरी चोरी 1936 में। सन 1971 में यह खजाना कोर्ट के आदेश पर सील किया गया था। क्या उससे पहले ही माल निकाला गया, इन सभी बातों के रहस्य से पर्दा उठना चाहिए।
मथुरा के वृंदावन में वृंदावन श्री बांकेबिहारी मंदिर का खजाना (तोषखाना) 54 वर्ष के बाद शनिवार को धनतेरस के अवसर पर खोला गया, लेकिन फिलहाल कोई बेशकीमती चीज इसमें नहीं मिली। खजाने में पीतल के बर्तन, संदूक और आभूषणों के खाली बॉक्स ही मिले हैं। अफसरों की निगरानी में दिल्ली से आए सीए ने पूरे सामान की सूची बनाई। खजाने में बड़े पैमाने पर हीरे, जवाहरात होने की बात कही जा रही थी मगर ऐसा कुछ नहीं निकला। इस दौरान सेवायतों ने हंगामा और नारेबाजी भी की। इसके बाद खजाने को फिर से सील कर दिया गया।
श्री बांकेबिहारी मंदिर की हाईपावर्ड कमेटी ने अपनी पहली बैठक में मंदिर के खजाने (तोषखाना) को खोलने के आदेश दिए थे। चूंकि तोषखाना में कोर्ट की सील लगी हुई थी तो प्रशासन ने सिविल जज जूनियर डिवीजन को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने 18 अक्तूबर को खजाना खोलने की तिथि नियत की थी। दोपहर एक बजे हाईपावर्ड कमेटी और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मंदिर पहुंची।
कमेटी के सदस्य सेवायत दिनेश गोस्वामी ने तोषखाने के द्वार पर दीप जलाकर पूजा की। जंग लगे ताले को कटर से काटा गया। बरसों से बंद पड़े खजाने में गैस निकली। इसके बाद मलबा नजर आया। मलबे की सफाई करने के बाद टीम ने अंदर पहुंचकर तोषखाने को चेक किया। इसी दरम्यान दो सांप निकलने के कारण टीम पीछे हट गई।
वन विभाग की टीम ने सांपों को पकड़ा। इसके बाद तलाशी कराई गई। खजाने में अभी तक पीतल के बर्तन, संदूक, लकड़ी का चौखटनुमा मंदिर और आभूषणों के खाली बॉक्स ही निकले हैं। एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने बताया कि खजाने में कोई कीमती वस्तु नहीं मिली है। दोबारा जरूरत हुई तो कोर्ट के आदेश पर इसे फिर से खोला जाएगा।
