नई दिल्ली : इसरो ने रविवार 26 अक्टूबर 2025 को भारतीय नौसेना के लिए CMS-03 या Gsat-7R सैटेलाइट लॉन्च करने वाले LVM-3 लॉन्च व्हीकल को श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्च पैड पर पहुंचा दिया. इस उपग्रह को पहले 2024 के आखिर में लॉन्च किया जाना था, लेकिन इसमें देरी हो गई. नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों के बीच ध्वनि, वीडियो और डेटा ट्रांसमीट करने के लिए कई बैंड का इस्तेमाल करते हुए, इस सैटेलाइट से भारत की समुद्री रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट : अपनी 5वीं ऑपरेशनल फ्लाइट में, ये रॉकेट 4,400 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को लेकर सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से प्रक्षेपित होगा, जिससे ये भारतीय धरती से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में लॉन्च होने वाला सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट बन जाएगा.
भारत को क्या फायदा होगा? : इसरो ने कहा, “सीएमएस-03 एक मल्टी-बैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट है जो भारतीय भूभाग सहित एक वाइड ओशीन रीजन में सेवाएं देगा. एलवीएम-3 के पिछले मिशन ने चंद्रयान-3 मिशन को लॉन्च किया था, जिसके बाद भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास कामयाबी के साथ उतरने वाला पहला देश बना.”
साइक्लोन का था खतरा : एलवीएम-3 के लॉन्च पैड पर पहुंचते ही, इसरो ने मिशन के लिए प्रक्षेपण-पूर्व कार्य शुरू कर दिए हैं, जिसका प्रक्षेपण पिछले कुछ दिनों से चक्रवात की भविष्यवाणी के कारण स्थगित किया जा रहा था. एक सूत्र ने टीओआई से कहा, “साइक्लोन की दिशा बदल गई है और अब हम 2 नवंबर को लॉन्च के लिए तैयार हैं.” सीएमएस-03 के लॉन्च के बाद, इसरो एक और एलवीएम-3 (LVM-3) मिशन शुरू करेगा जो अमेरिका के प्राइवेट कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड (Bluebird) का प्रक्षेपण करेगा.
