कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर विवादों में है. हुगली जिले के चुचुड़ा में तृणमूल कांग्रेस की विधायक असीमा पात्रा ने ऐसा बयान दे दिया है जिसने माहौल को गरमा दिया है. असीमा पात्रा ने एक जनसभा के दौरान बीजेपी नेताओं को खुली चेतावनी देते हुए कहा, ‘बंगाल में जो चुचुड़ा के वोटरों का नाम काटेगा, उन सभी बीजेपी नेताओं को पेड़ से बांध कर रखना, किसी को छोड़ना नहीं.’
यह विवादित टिप्पणी चुचुड़ा मोड़ पर हुई उस जनसभा में सामने आई जो विधायक असित मजूमदार के नेतृत्व में आयोजित की गई थी. इस सभा का आयोजन SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के विरोध में किया गया था. टीएमसी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रही है और इसके लिए जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं.
बीजेपी नेताओं को पेड़ से बांध दो और… : बुधवार को ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान धनेखाली की विधायक असीमा पात्रा मंच पर बोलते हुए अपने तीखे बयान के कारण चर्चा में आ गईं. उन्होंने कहा कि बीजेपी यह कोशिश कर रही है कि चुचुड़ा और आसपास के इलाकों में टीएमसी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से काटे जाएं. उन्होंने अपने समर्थकों को उकसाते हुए धमकी दी, ‘अगर किसी ने हमारे वोटरों के नाम काटने की कोशिश की, तो उसे पेड़ से बांधकर रखना होगा. किसी को नहीं छोड़ना.’
वह यह भड़काऊ बयान दे रही थीं तो वहां मौजूद भीड़ ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया. इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे डराने की राजनीति बताया.
असीमा का बयान लोकतंत्र के लिए खतरा : बीजेपी ने इस टिप्पणी की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि टीएमसी अब खुलेआम हिंसा की धमकी दे रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को असीमा पात्रा के खिलाफ संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह बयान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए सीधा खतरा है.
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक असीमा पात्रा के बयान पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है. हालांकि पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि असीमा पात्रा का बयान भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जिसका उद्देश्य किसी को धमकाना नहीं था.
पश्चिम बंगाल में क्यों पनपा है विवाद? : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर विवाद नया नहीं है. लेकिन जिस तरह नेता अब खुलेआम हिंसक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में तनाव को और बढ़ा सकता है. फिलहाल, हुगली और आसपास के इलाकों में यह मुद्दा गर्म है और चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.
