बांग्लादेश : अब यूनुस सरकार के खिलाफ भी सड़कों पर उतरे छात्र, वॉटर कैनन और आंसू गैस का हुआ इस्तेमाल

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नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के खिलाफ भी बांग्लादेशी छात्र अब सड़कों पर उतर आए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन चलाकर अगस्त 2024 में उन्हें अपदस्थ करने वाले छात्रों का गुस्सा अब यूनुस सरकार के खिलाफ सड़कों पर देखने को मिल रहा है। व्यापक पैमाने पर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को काबू करना यूनुस की पुलिस के लिए मुश्किल भरा हो गया। इसके बाद छात्रों पर वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल करना पड़ा।

क्या है मामला : न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार यह प्रोटेस्ट बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सैकड़ों प्राथमिक स्कूल शिक्षकों के वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में पुलिस की क्रूर कार्रवाई में बदल गया। इस विरोध प्रदर्शन में बांग्लादेशी छात्र भी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। दरअसल बांग्लादेशी सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में संगीत और पीटी के शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। इससे छात्रों और शिक्षकों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा हो गया है।

पुलिस ने शिक्षकों और छात्रों पर भांजी लाठियां : शिक्षा भवन के सामने जमा हुए प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस ने उन पर वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले, ध्वनि ग्रेनेड और लाठियां चलाईं, जिसमें कम से कम दर्जन भर लोग घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 100 से अधिक शिक्षकों व छात्रों के घायल होने की बात सामने आई है। शिक्षक संगठन ‘बांग्लादेश प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन’ के बैनर तले यह प्रदर्शन आयोजित हुआ था। शिक्षकों का कहना है कि उनकी सैलरी 1990 के दशक से अपरिवर्तित है, जबकि मुद्रास्फीति और जीवन यापन की लागत आसमान छू रही है।

शिक्षकों ने की वेतन वृद्धि की भी मांग : एक घायल शिक्षिका ने कहा, “हम बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन खुद भूखे मरने को मजबूर हैं,”। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से 50% वेतन वृद्धि की मांग की, जो लंबे समय से लंबित है। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने अवरोध पैदा किया था, इसलिए बल प्रयोग जरूरी था। लेकिन वीडियो फुटेज में साफ दिखा कि ज्यादातर महिलाएं और बुजुर्ग शिक्षक थे, जो नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। सोशल मीडिया पर #TeacherRightsBD ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स सरकार की इस कार्रवाई को ‘शिक्षा के दुश्मन’ का काम बता रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे कवर किया। यह घटना बांग्लादेश में श्रमिक अधिकारों पर सवाल उठाती है।

बांग्लादेश में बढ़ रही गरीबी और बेरोजगारी : यह प्रदर्शन बांग्लादेश की आर्थिक चुनौतियों का प्रतिबिंब है। देश में बेरोजगारी और गरीबी बढ़ रही है, जबकि शिक्षा बजट सीमित है। शिक्षक नेता अबू सैफ ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी न हुईं, तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल होगी। सरकार ने जांच का वादा किया है, लेकिन शिक्षकों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। यह घटना न केवल वेतन मुद्दे को उजागर करती है, बल्कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की कीमत भी। क्या यह आंदोलन बदलाव लाएगा? समय बताएगा।

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