दिल्ली ब्लास्ट : 68 संदिग्ध मोबाइल फोन, जो ब्लास्ट की जगह के पास थे सक्रिय; इनपर पाकिस्तान और तुर्किये से आईं कॉल

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नई दिल्ली : पाकिस्तान और तुर्किये से आने वाली कॉल, इंटरनेट रूटिंग और विदेशी सर्वर से जुड़ रहे फोन पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। धमाके के बाद पुलिस ने सुनहरी बाग और लाल किला के पास मोबाइल टॉवर से डंप डाटा उठाया। उसकी मदद से कई तकनीकी जानकारियां सामने आई हैं। अब जांच उसके आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि संदिग्ध नंबरों पर धमाके से ठीक पहले भारतीय नेटवर्क पर असामान्य डेटा-स्पाइक्स (डाटा का आदान-प्रदान हुआ) दर्ज कराया गया। सबसे अहम जानकारी विस्तृत फोन-मैपिंग के जरिये मिली है। डॉ. उमर की कार सुनहरी बाग पार्किंग में तीन घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही उस दौरान उसके 30 मीटर के दायरे में 187 फोन नंबर सक्रिय पाए गए।

बम विस्फोट जहां हुआ वहां पर पांच मिनट पहले और पांच मिनट बाद कुल 912 फोन सक्रिय मिले। दोनों स्थानों की डिजिटल लोकेशन-हिस्ट्री के मिलान में कुल 68 मोबाइल नंबर ऐसे मिले जो दोनों जगह पर उसी समय सक्रिय थे। यही 68 नंबर जांच का केंद्र बन गए हैं। सूत्रों की मानें तो इनमें से कई नंबर एक ही विदेशी सर्वर से जुड़े हैं, जिसने पाकिस्तान और तुर्किये दोनों देशों के आइपी-क्लस्टर के बीच लगातार स्विच ओवर दिखाया है। जांच एजेंसियां आशंका जता रही हैं कि इन सबके के लिए अलग-अलग प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल हुआ।

जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि कौन-कौन से फोन विस्फोट से कुछ मिनट पहले किस विदेशी आईपी से लिंक हुए। शुरुआती जांच में घटना स्थल पर मौजूद दो फोन ऐसे मिले हैं, जिनमें मिनट-टू-मिनट लोकेशन शिफ्ट हुई। इससे संकेत मिलता है कि फोन को ‘स्पूफ’ (यानी दूसरे नेटवर्क पर डाला गया) किया गया। इनका जांच एजेंसियां पता लगा  रही हैं।

दिल्ली में हालिया विस्फोट कांड की जांच अब हरियाणा के नूंह और फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार अब तक कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 4 को तीन दिन की सघन पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। छोड़े गए लोगों में तीन डॉक्टर और एक खाद विक्रेता शामिल हैं। हालांकि इन सभी के मोबाइल फोन अभी भी जांच एजेंसियों के पास हैं।

जांच एजेंसियां सभी हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा की गहन जांच कर रही हैं। इसी आधार पर आगे की हिरासत और संभावित गिरफ्तारियां तय होंगी।100 सीसीटीवी कैमरों की जांच के बाद कुछ फुटेज कब्जे में ली गई है। हिरासत में लिए गए रिजवान की बहन (जो शोएब की साली है) फरार है। छोड़े गए चार संदिग्धों के परिवार कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। मेवात क्षेत्र के सोशल मीडिया ग्रुप्स और चैट्स पर केंद्र से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम नजर रख रही है।

नूंह की हिदायत कॉलोनी में पिछले चार दिनों से केंद्रीय जांच एजेंसियां और स्थानीय पुलिस डेरा जमाए हुए हैं। डॉ. उमर जिस कमरे में रहा उसे सील कर दिया गया है। घर तक जाने वाले रास्तों पर हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है और उन पर 24 घंटे होमगार्ड और पुलिस जवान तैनात हैं। वहीं नूंह से पहले उठाए गए चार लोगों को कड़ी पूछताछ के बाद रिहा कर दिया।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां कॉलोनी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ डिजिटल सबूत, दस्तावेज और संदिग्ध सामग्री की तलाश में घर के भीतर गहन तलाशी ले रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह पिंटू और पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व चेयरमैन फरीदाबाद संदीप जोशी ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह राष्ट्र के साथ गद्दारी का मामला है और कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए।

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