पाकिस्तान : हिंदुओं-सिखों के धार्मिक स्थलों की संख्या घटी, 1817 मंदिरों-गुरुद्वारों में से अब बचे सिर्फ 37

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद : पाकिस्तान की एक ससंदीय समिति की रिपोर्ट में पड़ोसी देश के अंदर हिंदुओं की स्थिति को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों के धार्मिक स्थलों की संख्या भी लगातार घट रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 1817 हिंदू मंदिरों और गुरुद्वारों में से अब सिर्फ 37 ही चालू स्थिति में हैं। ये आंकड़े एक गंभीर वास्तविकता को उजागर करते हैं।

अल्पसंख्यक कॉकस पर संसदीय समिति के सामने पेश की गई एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि पूरे पाकिस्तान में 1,285 हिंदू मंदिरों और 532 गुरुद्वारों में से सिर्फ 37 ही चालू स्थिति में हैं। अन्य धार्मिक स्थल खराब सरकारी रखरखाव और हिंदू व सिखों की घटती आबादी के कारण जर्जर होते जा रहे हैं।

एक स्थानीय अखबार के मुताबिक, यह स्थिति सरकार की बेरुखी के कारण बनी है। समिति का संयोजक चुने जाने के बाद सीनेटर दानिश कुमार ने संकल्प लिया कि कॉकस अल्पसंख्यक सुरक्षा के संवैधानिक वादों को मूर्त रूप देने के लिए प्रयास करेगा। समिति के पहले सत्र में उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्याय और समानता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल नीतिगत सुधारों को लागू किया जाना चाहिए।

इस दौरान समिति के सदस्य डॉ रमेश कुमार वंकवानी ने इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड की कड़ी आलोचना की। कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों और गुरुद्वारों की देखभाल करने में पूरी तरह असफल रहा है। पैनल के सदस्यों ने भरोसा जताया कि फोरम अब अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन नहीं होने देगा।

2025 में पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं में 25 फीसदी का इजाफा : पाकिस्तान में आतंकवाद फिर बढ़ रहा है और 2025 में हिंसक घटनाएं 25 फीसदी बढ़ी हैं। खैबर पख्तूनख्वा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यह खुलासा इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक अनुसंधान और सुरक्षा अध्ययन केंद्र (सीआरएसएस) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में हुआ है। सीआरएसएस के मुताबिक,जनवरी से नवंबर 2025 तक दर्ज की गई कुल 3,187 मौतों में से 96 फीसदी से अधिक और हिंसा की सभी घटनाओं में से 92 फीसदी खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हुई।

रिपोर्ट कहती है कि 2024 में 2,546 लोग मारे गए थे, यानी बीते साल से लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2024 में 2,546 मौतें और 1,981 लोग घायल हुए थे। इनमें आम नागरिक, सुरक्षाकर्मी और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में मारे गए उग्रवादी शामिल थे। इस साल 1,188 हिंसक घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें आतंकी हमले और जवाबी कार्रवाई शामिल रही। ये ज्यादातर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान से बढ़ते तनाव और झड़पों के बाद खैबर पख्तूनख्वा में हाल के महीनों में हिंसा चरम पर है। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने नवंबर 2022 में युद्ध विराम टूटने के बाद हमले फिर शुरू कर दिए।

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