वंदे मातरम् के 150 वर्ष : बंकिम चंद्र के परपोते ने PM मोदी का जताया आभार, ममता पर उपेक्षा का आरोप

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कोलकाता : वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर सोमवार को संसद में आयोजित चर्चा पर बंकिम चंद्र चटर्जी के परपोते सजल चट्टोपाध्याय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। सजल चट्टोपाध्याय ने कहा कि अगर हम हिंदू हैं तो हमें वंदे मातरम को समझना होगा।

सजल ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर बंकिम चंद्र चटर्जी, उनके योगदान और परिवार की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, लंबे समय से उनके पूर्वज और राष्ट्र जागरण का प्रतीक गीत वंदे मातरम् बंगाल सरकार की अनदेखी का शिकार रहे हैं। दिल्ली से जब भी कोई केंद्रीय मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी जैसे गृह मंत्री अमित शाह आते हैं, तो वे परिवार से मिलते हैं, हालचाल पूछते हैं और वंदे मातरम् को आगे बढ़ाने पर चर्चा करते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता ने एक बार भी आमंत्रित नहीं किया।

सजल ने कहा, संसद में जो चर्चा आज हुई, यह बहुत पहले होना चाहिए था। मैं नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं। वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रीय मंत्र है, जिसने आजादी की लड़ाई में लोगों को प्रेरित किया। मेरे परिवार को आज तक बंगाल सरकार ने कुछ नहीं दिया। नई पीढ़ी इस गीत को भूल रही है, ऐसे समय में पीएम मोदी का कदम सराहनीय है।

सजल ने कहा कि मुख्यमंत्री (ममता) ने अभी तक कुछ नहीं किया, जबकि वह कर सकती थीं। राज्य सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं हुए। अगर दिल्ली से अमित शाह या कोई और आते हैं, तो वे हमारे बारे में पूछते हैं, हमें व्यक्तिगत रूप से बुलाते हैं। उन्होंने कहा कि वह कोई राजनीतिक बात नहीं कर रहे, सिर्फ अपना सच कह रहे हैं।

‘हम राजनीतिक लोग नहीं हैं, हम सिर्फ सच कहते हैं’ : उन्होंने आगे कहा, हम राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम राजनीति नहीं करते। हम सिर्फ सच बोलते हैं। 2018 में जब अमित शाह जी आए थे, उन्होंने बहुत सम्मान दिया, बिरला सभाघर में व्यक्तिगत रूप से मिले, पूछा कि परिवार को कोई समस्या तो नहीं और ‘वंदे मातरम्’ के प्रचार–प्रसार के लिए क्या किया जा सकता है। परंतु मुख्यमंत्री ने हमें अब तक नहीं बुलाया। बंकिम बाबू की उपेक्षा हुई है। उन्होंने जिस वंदे मातरम् को लिखा, उसमें सभी हिंदू देवी–देवताओं का उल्लेख है, इसी कारण उसे प्रतिबंधित किया गया था। जिस प्रकार बंकिम बाबू की उपेक्षा हुई, उसी प्रकार उनके परिवार की भी लगातार उपेक्षा हो रही है।

‘देश में बंकिमचंद्र चटर्जी के नाम पर न भवन है, न विश्वविद्यालय’ : सजल चट्टोपाध्याय ने कहा कि उनके परदादा भारत के पहले स्नातक थे, फिर भी देश में उनके नाम पर न कोई भवन है, न विश्वविद्यालय। उन्होंने कहा, रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर विश्वविद्यालय है, रविंद्र भवन है। क्या बंकिम बाबू के नाम पर विश्वविद्यालय नहीं हो सकता? क्या बंकिम भवन नहीं होना चाहिए? अगर केंद्र सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो आने वाली पीढ़ियां जान पाएंगी कि वंदे मातरम् क्या है, किसने लिखा था और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय कौन थे? अगर विश्वविद्यालय होगा, तो वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी भी बंकिम बाबू के योगदान को समझ पाएंगे। सजल चट्टोपाध्याय का कहना है कि उनकी बस यही इच्छा है कि आने वाली पीढ़ियां बंकिम चंद्र चटर्जी और उनके योगदान को सम्मानपूर्वक जानें और याद रखें।

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