नई दिल्ली/वॉशिंगटन : अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला में अलग-अलग ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की और देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंधक बनाकर किसी अन्य ठिकाने पर पहुंचा दिया। इस घटना के बाद वैश्विक राजनीति में एक तहलका सा मच गया है। सैकड़ों सवाल और फिर उसके जवाब की तलाश अभी भी जारी है।
बता दें कि ट्रंप ने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल मीडिया पर इस पूरे कार्रवाई के दौरान की कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति वेनेजुएला में चल रही कार्रवाई पर अपनी पैनी नजर बनाएं हुए थे। आइए तस्वीरों के माध्यम से ट्रंप के वॉर-रूम में चल रही गहमागहमी को समझते हैं।
ट्रंप ने बताया कैसे आधे घंटे में पूरी हुई कार्रवाई : ट्रंप के अनुसार, यह कार्रवाई महीनों की तैयारी के बाद अंजाम दी गई और महज आधे घंटे में पूरी हो गई। ट्रंप ने बताया कि मादुरो एक ऐसे राष्ट्रपति भवन में मौजूद थे जो किले की तरह सुरक्षित था। भवन के भीतर एक विशेष सेफ रूम भी था, जिसकी दीवारें मोटे स्टील की बनी थीं। ट्रंप के मुताबिक, मादुरो सेफ रूम तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही अमेरिकी सैनिक वहां पहुंच गए। अगर दरवाजा बंद हो जाता तो सैनिक स्टील काटने वाले विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार थे।
अमेरिका महीनों से कर रहा था इस कार्रवाई की तैयारी : अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा कि इस ऑपरेशन की कई महीनों तक लगातार तैयारी की गई। सेना ने मादुरो की हर गतिविधि से जुड़ी जानकारी जुटाई और उनके निवास जैसी हूबहू इमारत बनाकर अभ्यास किया गया। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह नहीं था कि मिशन सही हो, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि इसमें कोई गलती न हो।
कार्रवाई के समय बंद कर दी गई थी बिजली : ट्रंप ने दावा किया कि कराकस शहर की ज्यादातर बिजली बंद कर दी गई थी। इसी दौरान शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इसे सेना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का संयुक्त अभियान बताया। वहीं वेनेजुएला सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई में कुछ नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है, जबकि ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी पक्ष से कोई जान नहीं गई और केवल कुछ सैनिक हल्के रूप से घायल हुए।
ऑपरेशन में मौसम कैसे बना अहम कारक? : मौसम भी इस ऑपरेशन में अहम कारक रहा। ट्रंप के अनुसार, खराब मौसम के कारण कार्रवाई को कई दिनों तक टालना पड़ा। जब मौसम थोड़ा साफ हुआ, तब हेलीकॉप्टर समुद्र की सतह के बेहद पास उड़ते हुए वेनेजुएला में दाखिल हुए और ऊपर से लड़ाकू विमान सुरक्षा दे रहे थे।
इस अभियान को दिया गया ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका की तरफ से ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ चलाया गया था। अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने मीडिया को बताया कि इस ऑपरेशन में 150 से अधिक विमान शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद जटिल और योजनाबद्ध सैन्य अभियान था, जिसकी तैयारी कई महीनों से चल रही थी।
मादुरो को अमेरिकी कोर्ट में किया जाएगा पेश
ट्रंप ने दावा किया कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हेलीकॉप्टर से अमेरिकी युद्धपोत पर ले जाया गया है और अब उन्हें अमेरिका लाकर अदालत में पेश किया जाएगा। अमेरिकी न्याय विभाग ने दोनों पर ड्रग तस्करी और आतंक से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव
सैन्य कार्रवाई को रियल टाइम में देखा : अब अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। ट्रंप ने बताया कि वेनेजुएला पर हुई कार्रवाई को उन्होंने रियल टाइम में देखा। फॉक्स न्यूज के साथ एक लाइव फोन कॉल में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट से मिलिट्री ऑपरेशन को रियल टाइम में देखा।
मादुरो-पत्नी के खिलाफ चल सकता है मुकदमा : अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी ने कहा है कि वेनेजुएला के अपदस्थ नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क में अभियोग के बाद आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ेगा। बोंडी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दंपती को जल्द ही अमेरिकी धरती पर अमेरिकी अदालतों में कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। मादुरो पर 2020 में न्यूयॉर्क में अभियोग लगाया गया था
और अनुमान के मुताबिक ही बंधक बनाए गए मादुरो : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी बंधक बनाया गया है। ट्रंप ने अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज को बताया कि सुरक्षाबलों ने मादुरो को एक युद्धपोत पर बंधक बनाकर रखा है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने बताया था कि मादुरो को अमेरिका लाया जाएगा, जहां उन पर कानून के तहत मुकदमा चलेगा।
वेनेजुएला में अभियान के कब मिले साफ संकेत, सीआईए की क्या रही भूमिका? : अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी होने की वजह से सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए की भूमिका वेनेजुएला में तय थी। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर-दिसंबर में एलान किया था कि वेनेजुएला में सैन्य अभियान के लिए उन्होंने सीआईए को अधिकृत कर दिया है। हालांकि, तब इसकी वजह नशीले पदार्थों के ठिकानों को खत्म करना बताया गया था। ट्रंप ने एक मौके पर यहां तक कह दिया था कि अमेरिका अब वेनेजुएला की धरती की तरफ देख रहा है। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि अमेरिका किसी भी समय वेनेजुएला की धरती पर सैन्यबल उतार सकता है। हालांकि, इसके लिए सीआईए की खुफिया जानकारी काफी अहम होने वाली थी।
ट्रंप ने कब शुरू की वेनेजुएला पर कार्रवाई की तैयारी? : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 की शुरुआत में सत्ता संभालने के बाद से ही दक्षिण अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित करने और क्षेत्र में चीन-रूस के प्रभाव को खत्म करने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। हालांकि, शुरुआत में ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी हितों को ध्यान में रखते हुए वार्ता के जरिए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश शुरू की। ट्रंप ने सबसे पहले नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया और चीन, कनाडा जैसे देशों पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाया। इसी कड़ी में उन्होंने वेनेजुएला पर भी आरोप लगाए और उससे नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने को कहा।
कैसे चलाया गया ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व? : अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिकी बल रात 1:01 बजे (ईस्टर्न टाइम) मादुरो के ठिकाने पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर लिया गया ताकि जमीनी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इस दौरान हेलिकॉप्टरों पर गोलीबारी भी हुई, लेकिन अमेरिकी बलों ने पूरी ताकत से जवाब दिया। एक विमान को नुकसान पहुंचा, हालांकि सभी अमेरिकी विमान सुरक्षित लौट आए।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव : गौरतलब है कि यह कार्रवाई अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से चल रहे तनाव में अब तक की सबसे बड़ी और सीधी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और कानून के तहत उठाया गया, जबकि वेनेजुएला इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
