नई दिल्ली : चीनी हथियारों पर भरोसा करना पूरे देश को भारी पड़ा है. इससे पहले मई में पाकिस्तान को मेड इन चाइना एयर डिफेंस ने धोखा दिया था. जिसमें भारत की ब्रह्योस और स्कैल्प मिसाइलों आसिम मुनीर के सिर पर तांडव किया तो राष्ट्रपति तक बंकर में छिप गए थे. अब इससे भी बुरा हश्र वेनेजुएला का हुआ है. चीनी और रूसी एयर डिफेंस, स्टेल्थ विमानों को पकड़ने वाले रडार सिस्टम ने 3 जनवरी को धोखा दे दिया, जब अमेरिकी स्पेशल फोर्स और अमेरिकन एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने काराकस में तांडव किया.
3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने बेहद तेज और निर्णायक सैन्य कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व” को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी कराकास से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया.
निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के लिए करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें 150 से ज्यादा सैन्य विमान और स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स शामिल थीं. यह कार्रवाई न सिर्फ अपने लक्ष्य में सफल रही, बल्कि इससे वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम की बड़ी कमजोरियां भी सामने आ गईं, जो मुख्य रूप से चीन और रूस की तकनीक पर निर्भर था. वेनेजुएला का एयर डिफेंस नेटवर्क चीन और रूस से मिले आधुनिक रडार और मिसाइल सिस्टम पर आधारित था. इसमें चीन का JY-27 VHF बैंड रडार, जिसे “एंटी-स्टेल्थ” रडार बताया जाता है, और JYL-1 लॉन्ग-रेंज 3D रडार सिस्टम शामिल थे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला के पास करीब 9 JY-27 रडार और कई JYL-1 यूनिट्स थीं, जिनका मकसद स्टेल्थ लड़ाकू विमानों की शुरुआती पहचान करना था, लेकिन अमेरिकी हमले के दौरान ये सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हुए.
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से अंधे हो गए रडार : ऑपरेशन की शुरुआत में ही अमेरिका ने जबरदस्त इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जामिंग शुरू कर दी. इसकी वजह से चीनी रडार सिस्टम “अंधे” हो गए और वे अमेरिकी विमानों को समय रहते पकड़ ही नहीं पाए.अमेरिकी स्टेल्थ विमान बिना किसी चेतावनी के वेनेजुएला के एयरस्पेस में दाखिल हो गए और ऑपरेशन को अंजाम दिया.
रूसी S-300 और Buk सिस्टम भी बेकार : चीन के साथ-साथ रूस से मिले S-300VM और Buk-M2E मिसाइल सिस्टम भी इस हमले को रोकने में पूरी तरह फेल रहे. अमेरिकी सेना ने सटीक हमलों और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स से इन सिस्टम्स को निष्क्रिय कर दिया. इससे साफ हो गया कि कागजों पर ताकतवर दिखने वाले सिस्टम, असली जंग में आधुनिक तकनीक के सामने टिक नहीं पाए.
चीनी हथियारों पर फिर उठे सवाल : इस ऑपरेशन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि निर्यात किए जाने वाले चीनी हथियार, असली युद्ध में कितने कारगर हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कम फ्रीक्वेंसी रडार भले ही थ्योरी में स्टेल्थ पकड़ने की बात करते हों, लेकिन आधुनिक जामिंग तकनीक के सामने ये कमजोर साबित होते हैं.
