गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन, कहा- अन्नदाता हैं अर्थव्यवस्था की रीढ़

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नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेहनती किसानों की पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ‘हम भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमारे देश की स्थिति और दिशा पर सोचने का मौका देता है।’

गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे : उन्होंने कहा, ‘हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की शक्ति ने 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत आज़ाद हुआ। हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने। 26 जनवरी, 1950 से हम अपने गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह से लागू हुआ।’

राष्ट्रवाद की भावना देश की एकता के लिए एक मजबूत आधार : राष्ट्रपति ने कहा, ‘लोकतंत्र की जन्मभूमि भारत, औपनिवेशिक शासन से आज़ाद हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूलभूत दस्तावेज़ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान किया।’

‘वंदे मातरम’ की रचना की 150वीं वर्षगांठ : उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवित रखने का हर प्रयास बहुत सराहनीय है। पिछले साल 7 नवंबर से हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए भी समारोह चल रहे हैं। यह गीत, जो भारत माता के दिव्य स्वरूप का सम्मान करता है, लोगों के दिलों में राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा करता है।’

प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का बहुत अच्छा प्रदर्शन : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘नेशनल सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन’ के तहत अब तक 6 करोड़ से ज़्यादा स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। लगभग एक लाख चालीस हज़ार छात्र एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कई छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे अभियान आदिवासी समुदायों में परंपराओं और आधुनिक विकास के बीच तालमेल बिठाने का काम कर रहे हैं।’

देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया : उन्होंने कहा,’धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘पीएम-जनमन योजना’ ने PVTG समुदायों सहित सभी आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाया है। हमारे अन्नदाता किसान हमारे समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मेहनती किसानों की पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। यह हमारे किसानों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि हम कृषि उत्पादों का निर्यात कर पा रहे हैं।’

किसानों ने प्रभावशाली उदाहरण पेश किए : उन्होंने कहा, ‘कई किसानों ने सफलता के बहुत प्रभावशाली उदाहरण पेश किए हैं। यह सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है कि हमारे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, कम ब्याज दरों पर ऋण मिले, प्रभावी बीमा कवरेज मिले, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिलें, सिंचाई की सुविधा मिले, उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरक मिलें, आधुनिक कृषि पद्धतियों तक पहुंच मिले, और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहन मिले। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ हमारे किसानों के योगदान का सम्मान कर रही है और उनके प्रयासों को मज़बूत कर रही है।’

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