फरीदाबाद : एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। संस्था का कहना है कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम यूनिवर्सिटी के आचरण से मेल नहीं खा रहे। वहीं दूसरी तरफ अल-फलाह यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को एडमिनिस्ट्रेशन ने बंद कर दिया है।
एआईयू ने अपने बयान में क्या कहा? : एआईयू ने अपने बयान में कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के उपनियमों के अनुसार, किसी भी विश्वविद्यालय की सदस्यता तब तक बनी रहती है जब तक वह ‘सद्भावपूर्ण स्थिति’ में होता है। हालांकि, मीडिया में आई खबरों के आधार पर यह जानकारी मिली है कि फरीदाबाद, हरियाणा स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय वर्तमान में अच्छी स्थिति में नहीं प्रतीत होता। इसलिए, एआईयू ने निर्णय लिया है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
एनएएसी ने भेजा कारण बताओ नोटिस : राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एनएएसी ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर झूठी जानकारी देकर आमजन, अभिभावकों और छात्रों को गुमराह किया है।
एनएएसी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने यह दर्शाया कि उसे परिषद से मान्यता प्राप्त है, जबकि वास्तविकता यह है कि उसकी मान्यता की अवधि कई वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है। परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि क्यों उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए और क्यों उसे भविष्य के मूल्यांकन से अयोग्य घोषित न किया जाए।
मान्यता की अवधि खत्म होने के बाद भी दिखाई सक्रिय : एनएएसी के अनुसार, अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को 23 मार्च 2013 से 22 मार्च 2018 तक 4 में से 3.08 सीजीपीए के साथ ग्रेड ए मान्यता प्राप्त थी। इसी तरह, अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग के अंतर्गत आने वाले टीचर एजुकेशन विभाग को 27 मार्च 2011 से 26 मार्च 2016 तक एनएएसी की मान्यता मिली थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने दोबारा प्रत्यायन के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन वेबसाइट पर पुरानी मान्यता को सक्रिय दिखाकर लोगों को गुमराह किया।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खातों में फंडिंग की भी होगी जांच : दिल्ली में बम धमाके, फरीदाबाद में 2900 किलो से अधिक विस्फोटक समेत अन्य हथियार बरामद होने और सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के तार धौज की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ही जुड़े हैं। ये मामला सामने आने के बाद अब यूनिवर्सिटी के बैंक खातों व फंडिंग की जांच भी जल्द शुरू होने वाली है। ईडी व आर्थिक अपराध शाखा इन खातों व इनमें आने वाली फंडिंग को लेकर जांच करेंगे।
वहीं यूनिवर्सिटी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मामला सामने आने के बाद से ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन अलर्ट है। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को फीस व अन्य चार्ज जमा करने को लेकर दो दिन पहले ही मना कर दिया गया है। छात्रों को कहा गया है कि वे अभी फिलहाल किसी भी तरह की ऑनलाइन ट्रांजेक्शन उन्हें बताए गए यूनिवर्सिटी के बैंक खाते में न कराएं। इसके पीछे कारण बताया गया है कि प्रबंधन ने कुछ समस्या के चलते कुछ समय के लिए इसे रोका जा रहा है और जल्द ही अगले निर्देशों के बारे में सूचना दे दी जाएगी।
खुफिया विभाग के एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार अल फलाह यूनिवर्सिटी में जम्मू कश्मीर के छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। कई तरह की बातें चर्चाओं में हैं कि खाड़ी देशों से यहां पर फंडिंग आती है। इसी के चलते जम्मू कश्मीर के काफी छात्र यहां आकर पढ़ाई कर रहे हैं। ये कितना सही है, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी के खातों की जांच करना बेहद जरूरी है। तभी खुलासा होगा कि यहां पर फंडिंग कहां से आ रही है और कहीं उसी फंडिंग का प्रयोग तो इस आतंकी मॉड्यूल ने देश विरोधी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया है।
