पटना : बिहार की राजधानी पटना के करबिगहिया मुहल्ले में शुक्रवार की शाम एक घर में लगी आग ने एक बुजुर्ग दंपत्ति की दुनिया उजाड़ दी। इस भीषण हादसे में 65 वर्षीय मालती देवी की जिंदा जलकर मौत हो गई। यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शारीरिक लाचारी और नियति के क्रूर प्रहार की कहानी बन गई।
हादसे की शुरुआत शुक्रवार देर शाम हुई, जब मुहल्ले के एक मकान से अचानक धुएं का गुबार और आग की लपटें उठती देखी गईं। घर के अंदर 65 वर्षीय मालती देवी और उनके 75 वर्षीय पति बलीराम चौधरी मौजूद थे। विडंबना यह थी कि पति-पत्नी दोनों ही पैरालिसिस (लकवा) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। मालती देवी की स्थिति अधिक नाजुक थी, वे चलने-फिरने में पूरी तरह अक्षम थीं।
जानकारी के मुताबिक जैसे ही घर में आग फैली, मालती देवी चाहकर भी खुद को सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जा सकीं। उनके पति बलीराम चौधरी ने अपनी आंखों के सामने पत्नी को आग की लपटों में घिरते देखा। उन्होंने चीख-पुकार मचाकर लोगों को मदद के लिए बुलाया, लेकिन शारीरिक लाचारी के कारण वे खुद अपनी पत्नी को बाहर निकालने में असमर्थ रहे।
उन्हें बचाने के प्रयास में बलीराम चौधरी भी झुलस गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि घटना के समय घर में कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। मालती देवी का छोटा बेटा रवि शंकर चौधरी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुछ खरीदारी करने बाजार गया हुआ था। घर के बाहर से आग की लपटें उठती देख पड़ोसियों में अफरा-तफरी मच गई।
पड़ोसियों ने तुरंत दरवाजा तोड़कर घर के अंदर घुसने की हिम्मत दिखाई। भारी मशक्कत के बाद लोगों ने बलीराम चौधरी को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक आग ने मालती देवी को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। आग इतनी भयावह थी कि जब तक उस पर काबू पाया जाता, मालती देवी दम तोड़ चुकी थीं।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायल बलीराम चौधरी को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राथमिक जांच में आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। कुल मिलाकर स्थानीय स्तर पर अफरा- तफरी का माहौल है। वहीं लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में माता- पिता को छोड़कर संतान को कहीं बाहर नहीं जाना चाहिए।
