नई दिल्ली : बॉलीवुड का कैसेट किंग को दुनिया को अलविदा कहे हुए 28 साल हो चुके है. साल 1997 में दिन दहाड़े उन पर 16 गोलियों की बौछार हुई. कहा जाता है उनकी चीखें अंडरवर्ल्ड के लोग फोन पर करीबन 10 मिनट तक सुनते रहे. इस भयानक घटना से उस वक्त हर कोई सदमे में थे.यहां तक कि लोगों ने डर के मारे घर से बाहर निकलना तक बंद कर दिया था. लेकिन अभी हाल ही में राकेश मारिया ने एक ताजा इंटरव्यू में बताया कि कैसे उन्हें गुलशन कुमार की हत्या से कुछ महीने पहले ही अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने उन्हें टारगेट की जानकारी दी थी.
उन्होंने बताया कि उन्हें महीनों पहले ही टिप मिल गई थी. राकेश मारिया ने राज शमानी के साथ पॉडकास्ट में गुलशन कुमार की मौत के बारे में बात की. राकेश मारिया ने राज शमानी से बातचीत में कहा, ‘अप्रैल 1996 में रात के 3 बजे मुझे लैंडलाइन पर एक कॉल आई और उस शख्स ने मुझे बताया कि गुलशन कुमार का विकेट गिरने वाला है. उसने बताया कि अबू सलेम ये सब कर रहा है और वह प्लान कर रहा है कि गुलशन को शिव मंदिर के बाहर गोली मारे, जहां गुलशन अक्सर जाया करते थे.’
हत्या की रची थी साजिश : राकेश मारिया ने आगे कहा, ‘मुखबिर ने बताया कि अबू सलेम गुलशन की हत्या की साजिश रच रहा है और जैसे ही वो की तरह रोज शिव मंदिर जाएंगे उन्हें गोली मार दी जाएगी. सुबह के करीब 2-3 बजे होंगे. मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरी पत्नी ने मुझे कॉल के बाद बैठे देखा और उसे यह सब होते हुए देखने की आदत थी. उसने कहा- तुम किसी को इन्फॉर्म क्यों नहीं करते?’ मैंने कहा- हां, मैं करूंगा.’
महेश भट्ट को किया कॉल : राकेश मारिया ने कहा, ‘सुबह करीब 6:30-7 बजे मैंने महेश भट्ट को कॉल किया जिन्होंने गुलशन कुमार के टी-सीरीज के लिए कई रोमांटिक फिल्में डायरेक्ट की थीं. मैंने उनसे कहा-तुम उन्हें कहो कि वो अपने घर से बाहर न निकलें, अगर वो शिव मंदिर के लिए जा रहे हैं. मैं क्राइम ब्रांच से बात कर रहा हूं और कोई प्रोटेक्शन उनके लिए भिजवा रहा हूं.’
राकेश ने आरोप लगाया कि पहली चेतावनी के कई महीने बाद गुलशन कुमार और उनके सिक्योरिटी गार्ड लापरवाह हो गए थे, जिसकी वजह से वे अकेले ही उसी शिव मंदिर गए, जहां उनकी हत्या कर दी गई. उन्होंने कहा, ‘मुझे पता चला कि मुंबई पुलिस ने उन्हें सुरक्षा दी थी, लेकिन उनकी नोएडा में बड़ी कैसेट फैक्ट्री थी, इसलिए यूपी पुलिस ने भी उन्हें बड़ी संख्या में गार्ड दिए थे. वे उनके साथ थे, लेकिन समय के साथ लोग लापरवाह हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि टारगेट की जानकारी बहुत पहले मिली थी और कुछ हुआ नहीं. किसी त्योहार के मौके पर उनके बॉडीगार्ड छुट्टी पर चले गए और वे एक दिन बिना गार्ड के शिव मंदिर गए और वहीं उनकी हत्या कर दी गई.’
