नई दिल्ली/लंदन : ब्रिटेन की राजधानी लंदन में अवैध घुसपैठियों, चरमपंथी ताकतों और इस्लामिक आतंकवाद को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ. इस आयोजन को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला. अवैध प्रवासियों को देश से फौरन बाहर भगाने की मांग करने के लिए लंदन की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन में बड़ी तादाद में महिलाएं भी शामिल हुईं. सभी ने सरकार से फौरन कार्रवाई करने और घुसपैठियों की नाक में नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है.
अवैध प्रवासियों के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन : शनिवार को सेंट्रल लंदन में दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित मार्च में 1,50,000 से ज्यादा लोग इकट्ठे हुए. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न अपराधों के लिए कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें भीड़ के आक्रामक रुख का सामना करना पड़ा. पुलिस पर बोतलें, डंडे और बीयर के डिब्बे जैसे हथियार फेंके गए. रॉबिन्सन समर्थकों को घेरा तोड़ने से रोकने के दौरान कुछ अधिकारियों पर हमला किया. स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर तक ट्राफलगर स्क्वायर के पास तनाव बढ़ने पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंगा पुलिस, घुड़सवार टुकड़ियां और लाठियों से लैस अधिकारियों को तैनात करना पड़ा.
सड़क पर उतरे लाखों लोग : लंदन की सड़कों पर एंटी इमीग्रेशन प्रोटेस्ट के आयोजन में लोगों का भारी हुजूम उमड़ा. यूं तो पूरे ब्रिटेन में इस मुद्दे पर समय समय पर प्रदर्शन होते रहते हैं. इस बार राजधानी लंदन में आयोजित आव्रजन विरोधी प्रदर्शन में लाखों की भीड़ उमड़ी मानो पूरा शहर सड़कों पर उतर आया हो. दक्षिणपंथी नेता के आह्वान पर पहुंचे लाखों लोग ब्रिटिश संसद के मुख्य द्वार वेस्टमिंस्टर की ओर बढ़े. दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में पुलिस की तैनाती के दौरान 26 पुलिस अधिकारी घायल हो गए. इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 1,50,000 लोगों ने मध्य लंदन में मार्च किया. मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि यूनाइटेड द किंगडम रैली में तनाव बढ़ गया, जहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें और अन्य हथियार फेंके, जिससे चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.
लाखों लोगों का हुजूम : टेक अरबपति एलन मस्क ने व्हाइटहॉल में वीडियो लिंक के जरिए प्रदर्शनकारियों से बात की. 25 लोगों को विभिन्न अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया है. जब टॉमी रॉबिन्सन के समर्थकों का हुजूम लंदन की सड़कों पर था उसी दौरान एक और समूह ने ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ नामक प्रदर्शन का आयोजन किया. दूसरी ओर 5,000 लोग नस्लवाद-विरोधी समूह स्टैंड अप टू रेसिज्म के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. दो अलग-अलग समूहों को एक दूसरे से दूर रखने के लिए लंदन पुलिस को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा.
एक ही नारा एक ही नाम… : प्रदर्शनकारी लगातार ये मांग कर रहे थे कि देश के कोने कोने से बसे और छिपे घुसपैठियों को ढूंढ-ढूंढ कर निकाला जाए और फौरन उनके देश वापस भेजा जाए. सेंट्रल लंदन में एक व्यापक पुलिसिंग अभियान चलाया गया, जिसमें मेट ने 1,000 अधिकारियों को तैनात किया और लीसेस्टरशायर, नॉटिंघमशायर, डेवोन और कॉर्नवाल सहित अन्य बलों से 500 अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा. सहायक पुलिस आयुक्त मैट ट्विस्ट ने कहा कि अधिकारियों ने बिना किसी डर या पक्षपात के अपना काम किया और भीड़ को संभाला. इसमें कोई संदेह नहीं है कि कई लोग विरोध करने के अपने वैध अधिकार का प्रयोग करने आए थे, लेकिन कई लोग हिंसा पर आमादा भी थे.
पीएम कीर स्टार्मर के खिलाफ नारेबाजी : प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए आगे भी ऐसे विरोध मार्च का आयोजन करने की बात कही है. रॉबिन्सन ने X पर अपने संदेश में लिखा कि हम अपनी आज़ादी के लिए एकजुट होकर सेंट्रल लंदन की सड़कों पर जमा हो चुके हैं. लाखों लोग हमारे साथ हैं. ये मार्च ब्रिटेन में प्रवासियों के होटलों के बाहर विरोध प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ, इसमें शामिल लोगों ने यूनियन जैक और लाल-सफेद सेंट जॉर्ज क्रॉस झंडे लहराए. उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना करते हुए नारे लगाए और ‘उन्हें घर भेजो’ जैसे संदेश वाली तख्तियां भी दिखाएं.
इजराइल का झंडा दिखा : इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ में इंग्लैंड के राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ इजरायल का झंडा भी दिखा. कुछ लोगों ने अमेरिकी और इज़राइली झंडे भी दिखाए. कई प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ वाली कैप भी पहन रखी थी.
पुलिस का मार्च : लंदन में रॉबिंसन की रैली में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कन्जर्वेटिव नेता चार्ली कर्क की हाल ही में हुई हत्या पर भी शोक व्यक्त किया. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि उनके यहां पाकिस्तान, ईरान, इराक, अफगानिस्तान और सीरिया से आए हजारों शरणार्थी हैं जो अवैध काम धंधों यानी अपराध में लिप्त है. इसका नुकसान ब्रिटेन के महान लोगों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है.
अंग्रेजों को किस बात का डर? : ब्रिटेन के लोगों का एक डर यहां के कुछ शहरों में डेमोग्राफी का तेजी से बदलना और देश में बढ़ा क्राइम ग्राफ भी है. ब्रिटेन में 2021 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी है. ग्रेटर लंदन में मुस्लिम आबादी 10 लाख से ज्यादा है. यॉर्कशायर और हंबर में 10 फीसदी हो गई है. ब्रिटेन में इसी अनुपात में आबादी बढ़ती रही तो 2050 में मुस्लिमों की 11 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी.
ब्रिटेन में तुष्टिकरण! : ब्रिटेन में कुछ लोगों का मानना है कि यूके का इस्लामीकरण हो रहा है. कुछ दशकों में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है. 30 से ज्यादा शरिया काउंसिल हैं. ब्रिटेन में दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक आबादी मुस्लिमों की है. 2011 में 27 लाख मुस्लिम थे जो 2021 में बढ़कर 39 लाख हो गए. ब्रिटेन की आबादी का कुल साढ़े 6 फीसदी मुस्लिम हैं. जिस लंदन से ब्रिटेन की सरकार चलती है, वहां 40 फीसदी ईसाई और 15 फीसदी मुस्लिम हैं और हिंदू मात्र 5 फीसदी हैं. 2021 की जनगणना में पता चला कि मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है. ग्रेटर लंदन में मुस्लिम आबादी 10 लाख से ज्यादा है. यॉर्कशायर और हंबर में 10 फीसदी मुस्लिम आबादी है. इस रफ्तार से ब्रिटेन में साल 2050 में मुस्लिम आबादी 6.5 से बढ़कर 11 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी और ईसाइयों की आबादी 64 फीसदी से घटकर 45 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया गया है.
क्राइम ग्राफ बढ़ा : ब्रिटेन में कट्टरपंथ, नफरत और सांप्रदायिक दंगों में बढोतरी दर्ज की गई है. निगरानी समूह टेल मामा की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में इजरायली हमले के बाद, ब्रिटेन में नफरत बढ़ी है. रिपोर्ट बताती है कि 2024 में इस्लामोफोबिया की 5,837 घटनाएं दर्ज की गई, जो वर्ष 2023 में 3767 थीं.
