NASA : मंगल पर मिले जीवन के कुछ संकेत, पर्सीवरेंस रोवर ने संभावित बायो सिग्नेचर-जैविक कार्बन भी खोजा

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नई दिल्ली/वाशिंगटन : मंगल पर जीवन के कुछ और संकेत मिले हैं। नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने जेजीरो क्रेटर के ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन क्षेत्र में ऐसे रासायनिक-खनिज संकेत दर्ज किए हैं। इन्हें वैज्ञानिक बायो सिग्नेचर मान रहे हैं। बायो सिग्नेचर उन भौतिक, रासायनिक या संरचनात्मक संकेतों को कहते हैं जो बताते हैं कि कभी किसी ग्रह पर जीवन की गतिविधि हुई होंगी। यह जीवन के पक्के सबूत नहीं हैं, लेकिन यदि यह साक्ष्य सूक्ष्म जीवों से जुड़ा निकला तो इतिहास की बड़ी खोज साबित हो सकता है।

ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन जेजीरो क्रेटर का महीन चट्टानों से भरा क्षेत्र है। ये चट्टानें अरबों वर्ष पूर्व बहते पानी से बनी थीं। यहां रोवर ने लोहे का ऑक्साइड, फास्फोरस, सल्फर और सबसे खास जैविक कार्बन खोजा। जैविक कार्बन जीवन का आधार है। जांच में कई अनोखी आकृतियां सामने आईं। छोटे गोल दाने (पॉप्पी सीड्स) व धब्बेदार पैटर्न (लेपर्ड स्पॉट्स) में विवियनाइट व ग्रेगाइट जैसे खनिज पाए गए, जो पृथ्वी पर पानी से भरे, कम तापमान वाले वातावरण में बनते हैं।

सूक्ष्मजीवों का योगदान या भूगर्भीय प्रक्रिया : खोज की 2 संभावनाएं हैं। पहली, ये खनिज व संरचनाएं केवल भूगर्भीय प्रक्रियाओं से बनी हों। दूसरी, इनमें अरबों वर्ष पूर्व मौजूद सूक्ष्मजीवों का योगदान रहा हो। सल्फर आधारित संकेत सामान्यतः उच्च तापमान पर बनते हैं, लेकिन यहां उच्च तापमान के प्रमाण नहीं मिले। यह पहलू सूक्ष्मजीवों की भूमिका को पूरी तरह नकारने नहीं देता।

सैंपल रिटर्न मिशन की अहमियत : पर्सीवरेंस रोवर ने ब्राइट एंजेल के सैफायर कैन्यन से एक कोर सैंपल इकट्ठा किया है। यह नमूना फिलहाल सुरक्षित ट्यूब में रखा है। वैज्ञानिक चाहते हैं कि इसे भविष्य में पृथ्वी पर लाकर उन्नत प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किया जाए। इससे कार्बन आइसोटोप, खनिज संरचना और सूक्ष्म जीवाश्म जैसे संकेतों की जांच संभव होगी।

सबसे बड़ी खोज संभव : शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज जीवन का अंतिम प्रमाण नहीं है, लेकिन संभावित बायो सिग्नेचर है। यह बड़ी खोज हो सकती है। इससे  हमें यह पता लगेगा कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई और क्या ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन है।

पृथ्वी-मंगल की समानता : अरबों वर्ष पूर्व मंगल व पृथ्वी पर समान रासायनिक प्रक्रियाएं हो रही थीं। पृथ्वी पर तब सूक्ष्मजीव लोहे व सल्फर से ऊर्जा लेते थे। फर्क इतना है कि पृथ्वी की प्लेट टेक्टोनिक्स ने पुराने पत्थरों की संरचना बदल दी, जबकि मंगल पर वे सुरक्षित हैं।

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