पटना : बिहार की राजधानी पटना के दीघा घाट पर एक घटना ने पुलिस महकमे के साथ-साथ आम लोगों को भी गर्व से भर दिया। दरअसल, रविवार को हुई माघ पूर्णिमा के मौके पर दीघा घाट पर गंगा नदी में दो लोग नदी में डूब गए, जिसके बाद घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। लेकिन भीड़ में से किसी भी आम नागरिक ने बचाव की कोशिश के लिए नदी में प्रवेश नहीं किया। लोग तमाशा देखते रहे। लेकिन घटना की सूचना उस वक्त वहां से कुछ ही दूरी पर ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने वाली महिला कांस्टेबल तारा कुमारी को मिली।
महिला ट्रैफिक कांस्टेबल तारा कुमारी ने बिना किसी आदेश की प्रतीक्षा और लाइफ जैकेट या किसी सेफ्टी इक्विपमेंट का जुगाड़ किए बिना नदी में छलांग लगा दी। तारा कुमारी ने नदी में डूबे दोनों लोगों की तलाश शुरू की। भीड़ ने उनके इस काम को वीडियो में कैद किया गया और सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया। वीडियो में वो वर्दी पहने हुए पानी में उतरकर उस जगह की तलाश करती दिख रही हैं, जहां दोनों लोगों को आखिरी बार देखा गया था।
पुलिस ने बताया कि नदी में डूबे पीड़ितों की पहचान 50 वर्षीय गार्ड बाबू और 30 वर्षीय धनंजय कुमार के रूप में हुई है। दोनों गयाजी जिले के चाकन पुलिस स्टेशन इलाके के रहने वाले थे। वे धार्मिक स्नान में हिस्सा लेने के लिए पटना आए थे। माना जा रहा है कि वो नदी घाट की गहराई और लहरों से अनजान थे।
अपनी पुलिस यूनिफॉर्म में ही सीधे गंगा नदी की तेज धार में कूदने वाली तारा कुमारी ने काफी देर तक डूबते युवकों को तलाशने और बचाने की कोशिश जारी रखी। हालात बेहद खतरनाक थे, लेकिन उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई। इस दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए और महिला कांस्टेबल के साहस की सराहना करने लगे। हालांकि महिला कांस्टेबल को दोनों लोगों को तलाश करने में सफलता नहीं मिली, लेकिन सभी उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं।
बाद में स्थानीय पुलिस, गोताखोरों और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) की टीमों ने शाम तक तलाशी अभियान जारी रखा। अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से नदी में नहाते समय सावधानी बरतने की अपील की है, और अप्रत्याशित धाराओं और गहराई में अचानक गिरावट के बारे में चेतावनी दी है।
