बिहार : प्रेमी का पेट फाड़ा, प्राइवेट पार्ट काट पौधे पर टांगा! 

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रोहतास : रोहतास जिले से प्रेम प्रसंग के प्रतिशोध की एक रूह कंपा देने वाली वारदात का कानूनी अंत हो गया है। करीब पौने सात साल पहले हुई मन्नु कुमार की नृशंस हत्या के मामले में जिला जज चार अनिल कुमार की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मृतक की प्रेमिका, उसके पति, भाई और पिता समेत कुल चार लोगों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही, सभी दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला न्याय के प्रति समाज के विश्वास को मजबूत करता है और जघन्य अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस का संदेश देता है।

यह मामला मार्च 2019 का है, जिसने भगवानपुर गांव को दहला दिया था। वारदात की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने मन्नु की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया था। मृतक का पेट चाकू से फाड़ दिया गया था और उसके गुप्तांग को काटकर एक सरसों के पौधे पर लटका दिया गया था। 

इस जघन्य कृत्य ने न केवल पुलिस प्रशासन को हिलाकर रख दिया था, बल्कि स्थानीय समुदाय में भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। मृतक के पिता अशोक चौधरी ने इस मामले में स्थानीय अगरेर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

अदालत द्वारा सजा पाने वालों में मन्नु की प्रेमिका सुमन देवी उर्फ चुमन देवी, उसका पति प्रभाकर सिंह, सुमन का पिता दुधेश्वर चौधरी और उसका भाई फूलचंद शामिल हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरी साजिश बेहद सुनियोजित थी। वारदात से महज दो दिन पहले सुमन अपने पति के साथ ससुराल प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से अपने मायके भगवानपुर आई थी। 4 मार्च 2019 की शाम को सुमन ने ही फोन करके मन्नु को मिलने के लिए बुलाया था। मन्नु बिना किसी को बताए घर से निकला, लेकिन वह फिर कभी वापस नहीं लौटा। अगले दिन 5 मार्च को उसका क्षत-विक्षत शव सरसों के खेत में बरामद हुआ।

मुकदमे के दौरान अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने कुल 9 गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने यह साबित कर दिया कि मन्नु की हत्या प्रेम त्रिकोण और पारिवारिक सम्मान (Honor) के नाम पर की गई एक सोची-समझी साजिश थी।

हत्या से कुछ दिन पहले भी मन्नु को बंधक बनाया गया था और इस पर पंचायत भी हुई थी, लेकिन सुमन और मन्नु का मिलना जारी रहा, जो अंततः इस खूनी अंजाम का कारण बना। बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताने की कोशिश की, लेकिन साक्ष्यों की मजबूती के सामने उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया है।

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