नई दिल्ली : रूस ने यूक्रेन जंग से नाटो को दूर करने के लिए फिर बड़ी चेतावनी दी है. उसने न्यूक्लियर मिसाइल के बाद अब एक और बड़ा धमाका किया है. रूस ने ‘पोसाइडन’ टॉरपीडो का टेस्ट कर दुनिया को दहला दिया है. इसे अमेरिका और नाटो देशों के लिए रूस का बड़ा संदेश माना जा रहा है, जो यूक्रेन को लगातार हथियारों की मदद करते आ रहे हैं.
अमेरिका-नाटो को भेजा रणनीतिक संदेश : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि रूस ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एक नए टॉरपीडो का सफल परीक्षण किया है. इस खतरनाक टॉरपीडो का नाम ‘Poseidon’ है. यह सुपर टॉरपीडो रूस की सैन्य क्षमता को नई दिशा देगा. उन्होंने बताया कि टॉरपीडो का परीक्षण एक परमाणु पनडुब्बी से किया गया. पुतिन ने इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली पानी के भीतर चलने वाले हथियारों में से एक बताया गया है.
टॉरपीडो की तकनीकी विशेषताएं : रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह टॉरपीडो परमाणु ऊर्जा से संचालित है और इसकी रेंज लगभग असीमित बताई गई है. यह महीनों तक समुद्र के भीतर गहराई में रह सकता है और किसी भी तटीय शहर या नौसैनिक अड्डे को निशाना बना सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस टॉरपीडो की गति पारंपरिक हथियारों की तुलना में कई गुना अधिक है और यह बड़े पैमाने पर विनाश कर सकता है.
‘बुरेवेस्टनिक’ परीक्षण के बाद नया कदम : यह परीक्षण रूस के हालिया परमाणु क्रूज़ मिसाइल ‘Burevestnik’ के प्रयोग के तुरंत बाद हुआ है. उस मिसाइल में भी परमाणु इंजन लगा है और वह लगभग 14,000 किलोमीटर की उड़ान भरने में सक्षम बताई गई. दोनों परीक्षणों को मिलाकर रूस ने संकेत दिया है कि वह पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक परमाणु तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
क्या जताना चाह रहे हैं पुतिन? : डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस के इन परीक्षणों का उद्देश्य अमेरिका और नाटो को रणनीतिक संदेश देना है. पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं. ऐसे में पुतिन यह दिखाना चाहते हैं कि रूस तकनीकी और सामरिक रूप से स्वतंत्र है. यह कदम रूस की ‘न्यूक्लियर डिटरेंस पॉलिसी’ को और सुदृढ़ बनाता है. साथ ही पश्चिमी मिसाइल डिफेंस नेटवर्क को चुनौती देता है.
रूस का उकसावे वाला कदम- नाटो : इन परीक्षणों ने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है. नाटो ने इसे उकसाने वाला कदम बताते हुए आलोचना की है, जबकि अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. रूस की यह रणनीति भविष्य में परमाणु हथियारों की नई दौड़ को बढ़ावा दे सकती है. कई विशेषज्ञों ने इसे शीतयुद्ध-कालीन हथियार प्रतिस्पर्धा की वापसी बताया है.
पर्यावरण को लेकर बढ़ा जोखिम : परमाणु ऊर्जा से चलने वाले हथियारों को लेकर पर्यावरणीय और तकनीकी चिंताएं भी बढ़ी हैं. विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि समुद्र में रेडियोधर्मी ईंधन के रिसाव से पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है. पहले भी रूस की कुछ परमाणु परियोजनाओं में तकनीकी दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, जिससे सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे हैं.
तेज होगी परमाणु हथियारों की दौड़! : रूस के इस कदम ने विश्व शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है. जहां अमेरिका और नाटो इसे सैन्य खतरे के रूप में देख रहे हैं, वहीं चीन ने इसे रूस की तकनीकी प्रगति का उदाहरण कहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा विशेषज्ञों ने अपील की है कि सभी परमाणु शक्तियां संयम बरतें और वैश्विक स्थिरता को प्राथमिकता दें. यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि परमाणु हथियारों की होड़ अब एक बार फिर दुनिया में तेज होने जा रही है.
