SCO Summit 2025 : तियानजिन में SCO सम्मेलन शुरू, एक मंच पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग

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नई दिल्ली : चीन के तियानजिन में ग्लोबल डिप्लोमेसी का एक नया चैप्टर देखने को मिला. SCO समिट के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मेजबान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ दिखे. ग्रुप फोटो सेशन के दौरान एससीओ के सभी सदस्य एक मंच पर एक साथ मौजूद थे. SCO समिट के मंच पर जब पीएम मोदी पहुंचे तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका स्वागत किया.

इस दौरान उनकी पत्नी Peng Liyuan भी साथ थीं. फोटो सेशन के बाद पीएम मोदी ने जिनपिंग और उनकी पत्नी से हाथ मिलाया. इस दौरान दोनों नेताओं के चेहरे पर खुशी थी. पीएम मोदी और पुतीन के बीच ताजिकिस्तान और किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति हैं. एससीओ ग्रुप फोटो सेशन पर पूरी दुनिया की नजर थी. जिनपिंग से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कई मालदीव, नेपाल सहित कई देशों के नेताओं से मुलाकात की.

ग्लोबल ऑर्डर में ये मुलाकात माइलस्टोन बन सकता है : जानकारों का कहना है कि ग्लोबल ऑर्डर में ये मुलाकात माइलस्टोन बन सकता है. मगर विरोधाभास है जो तीन देशों (भारत-रूस और चीन) के बीच में हमेशा रहा है. इस मुलाकात के बाद ट्रंप की टैरिफ आंधी उड़ पाती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. अगर ये होता है तो भारत की जय जय होगी. मगर दूसरी तरह जानकारों का ये भी कहना है कि इस मुलाकात के बाद अगर भारत-चीन के बीच कोर मुद्दा जैसे चीन को पाकिस्तान को सहयोग करना बंद दे, भारत को उसकी जमीन लौटा दे…वगैरह-वगैरह, सुलझ जाए तो अच्छी बात होगी.

SCO समिट पर ट्रंप की पैनी नजर : ट्रंप के द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बाद इस समिट को बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इस समिट में ट्रंप को छोड़ बाकी सभी महाशक्तियां एक ही मंच पर मौजूद थीं. हाल के समय में भारत और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियां को लेकर अमेरिका काफी परेशान है. इसके पीछे की वजह रूसी तेल. अमेरिका नहीं चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदे. उसने हाल ही में इसको लेकर आपत्ति जताई थी. अमेरिका ने कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है और इससे बड़ा मुनाफा कमा रहा है. इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

भारत ने विरोध जताते हुए कहा था कि यह खरीद वैश्विक बाजार की स्थिति पर आधारित है. भारत ने यह भी कहा कि उसने रूसी तेल खरीदकर वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद की है. अमेरिका और यूरोपीय देशों ने खुद हमारे इस कदम की सराहना की थी. भारत ने कहा कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है. वह रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा.

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