नई दिल्ली : मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयोग के निर्देशानुसार अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए कई प्रकार के पहचान एवं निवास प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग ने पहचान के लिए पासपोर्ट, आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, पेंशन आदेश, राज्य या केंद्र सरकार व उसके उपक्रम का पहचान पत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, ओबीसी/एससी/एसटी प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, भूमि/मकान आवंटन पत्र सहित अन्य सरकारी दस्तावेजों को मान्य किया है। इसके साथ ही एक जुलाई 1987 से पूर्व जारी कोई भी सरकारी पहचान पत्र या मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय का शैक्षिक प्रमाणपत्र भी स्वीकार्य रहेगा।
बताया गया कि योग्य नागरिकों को समय पर दस्तावेजों के साथ फार्म-6 भरकर अपने बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) के पास जमा करना चाहिए, ताकि आगामी चुनाव में वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
