चीन : दलाई लामा के पुनर्जन्म प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण का दावा, खारिज किया निर्वासित तिब्बती नेता का अधिकार

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नई दिल्ली/बीजिंग : तिब्बत पर चीन की सत्तावादी पकड़ का प्रदर्शन करते हुए  बीजिंग ने एक बार फिर दलाई लामा की पुनर्जन्म प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। उसने इस मामले पर आध्यात्मिक नेता के अधिकार को खारिज कर दिया है। तिब्बत एन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान तथाकथित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के अध्यक्ष गामा सेडैन ने टीएआर की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर बीजिंग में हुए एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान दिया।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की टीएआर समिति के उप-सचिव, सेडैन ने घोषणा की कि दलाई लामा के पुनर्जन्म के बारे में चीन सरकार का निर्विवाद रूप से अंतिम निर्णय होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया घरेलू स्तर पर कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा स्वीकृत विधियों के जरिये और सिर्फ बीजिंग की स्पष्ट स्वीकृति के साथ ही पूरी की जानी चाहिए। इसमें विवादास्पद स्वर्ण कलश लॉटरी निकालने की रस्म भी शामिल है। यह कट्टर दावा दलाई लामा के रुख के बिल्कुल उलट है। पिछले महीने अपने 90वें जन्मदिन समारोह के दौरान, निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने दोहराया कि उनके पुनर्जन्म का निर्धारण पूरी तरह से उनके द्वारा इसी उद्देश्य के लिए स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था द्वारा किया जाएगा, न कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में।

तिब्बत पर वैचारिक-धार्मिक नियंत्रण चाहता है बीजिंग : तिब्बती रिव्यू ने जिक्र किया कि सेडैन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बीजिंग के शासन वाले क्षेत्र में उनके पुनर्जन्म का कोई सवाल ही नहीं है। चीन लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा को अलगाववादी बताता रहा है, हालांकि उन्होंने चीन के भीतर केवल वास्तविक स्वायत्तता की मांग की है, स्वतंत्रता की नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग तिब्बत पर पूर्ण वैचारिक और धार्मिक नियंत्रण से कम कुछ नहीं चाहता। चीन पहले भी तिब्बत में धार्मिक उत्तराधिकार के मामले में दखल करता रहा है। 1995 में उसने एक छह साल के बच्चे को अगवा कर 11वें पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी और उसकी जगह एक चुने हुए वफादार को नियुक्त कर दिया था। मूल बच्चा, गेधुन चोएक्यी न्यिमा, आज तक लापता है।

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